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विज्ञान

सेक्स हार्मोन्स भी हैं मधुमेह का कारण

डायबटीज यानी मधुमेह इस बीच घर घर की बीमारी ज़रूर है, लेकिन डॉक्टर और वैज्ञानिक अब भी पूरी तरह नहीं जानते कि यह बीमारी क्यों और कैसे होती है. अब पता चला है कि सेक्स हार्मोन भी डायबटीज की बीमारी में अहम किरदार निभाते हैं.

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इतना तय है कि यदि कोई मोटा-तगड़ा है और चलने-फिरने से जी चुराता है, तो वह मधुमेह को न्यौता दे रहा है. डॉक्टर लंबे समय से यह भी जानते हैं कि जिसे मधुमेह रोग है, वह अधिकतर न केवल स्वयं भारी भरकम है, उसका लिवर यानी यकृत भी सामान्य से बड़ा और भारी होता है.

अब तक समझा जाता था कि शरीर के साथ-साथ यकृत का भी भारी होना शायद मोटापे का ही एक अनुषंगी प्रभाव है. लेकिन, जर्मनी में हुई एक खोज से संकेत मिलता है कि यकृत का बढ़ जाना और भारी हो जाना ही शायद मधुमेह रोग को जन्म देता है. इस में एक ख़ास प्रोटीन तथा स्त्री-पुरुष हार्मोनों की भी निर्णायक भूमिका होती है.

निर्णायक भूमिका

ट्यूबिंगन विश्वविद्यालय अस्पाताल के प्रधान डॉक्टर नोर्बर्ट स्टेफान इस बीच यही मानते हैं कि यकृत का मोटापा ही मधुमेह को जन्म देने वाला निर्णायक कारक है, "मधुमेह के होने में लिवर के मोटापे की निर्णायक भूमिका की ओर संकेत करने वाले प्रथम आंकडे़ हमें एक साल पहले मिले थे. हम यह सिद्ध कर सके थे कि ऐसे लोग, जो मोटापे से ग्रस्त तो हैं, पर जिन के लिवर में वसा यानी चर्बी नहीं है, उन्हें कम आयु में ही धमनी में कठोरता आ जाने की आर्टेरियोस्क्लेरोसिस, और इंसुलिन प्रतिरोध की शिकायत नहीं होती. दूसरे शब्दों में, शरीर मोटा होते हुए भी यदि लिवर मोटा नहीं है, तो धमनी काठिन्य और मधुमेह की बीमारी नहीं होती."

Insulin-Molekül

यौन हार्मोनों का दखल

आम तौर पर यह बताया जाता है कि जिनके यकृत में वसा की अधिक मात्रा नहीं होती, उन के भीतर एस एच डबल्ल्यू जी नाम के एक प्रोटीन की अधिकता होती है. यकृत में वासा का जमाव होने पर इस प्रोटीन का अनुपात तेज़ी से घट जाता है. यह प्रोटीन पुरुषों में टेस्टेस्टेरॉन और महिलाओं में ऐस्ट्रोजन जैसे लिंगसापेक्ष यौन हार्मोनों का नियमन करता है. डॉक्टर काफ़ी समय से जानते हैं कि मधुमेह होने में इन हार्मोनों की भी भूमिका होती है. अमेरिका में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता भी इसी नतीजे पर पहुँचे हैं कि रक्त में

इस ख़ास प्रोटीन की अधिक मात्रा मधुमेह की रोकथाम करती है.

कुंजी एक प्रोटीन के पास

डॉ.नोर्बर्ट स्टेफान बताते हैं कि अब शोध का विषय यह है कि एस एच डबल्ल्यू जी प्रोटीन, यौन हार्मोन और मधुमेह आपस में एक दूसरे को कैसे प्रभावित या नियंत्रित करते हैं, "यह अभी पता नहीं है कि रक्त में रहने वाला एस एच डबल्ल्यू जी प्रोटीन हमारे

Männer- und Frauenfüße im Bett

यौन हार्मोनों को किस तरह नियंत्रित करता है. ठीक इस समय इन हार्मोनों पर फिर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है. यह सारा अंतर्संबंध इतना पेचीदा है कि वैज्ञानिकों ने कुछ समय पहले इस बारे में आगे खोज करना छोड़ दिया था, हालांकि यह बात काफ़ी कुछ साफ़ हो गयी थी कि यौन हार्मोनों के नियमन और निर्माण की भी मधुमेह में एक प्रमुख भूमिका होती है. ठीक ठीक तो अब भी पता नहीं है कि यौन हार्मोन मधुमेह कैसे पैदा करते हैं, लेकिन एस एच डबल्ल्यू जी यह जानने में हमारी मदद कर सकता है कि रक्त में स्वतंत्र और नियंत्रित हार्मोनों का अनुपात कैसा होना चाहिये, ताकि हम मधुमेह होने के ख़तरे का बेहतर अनुमान लगा सकें."

यकृत का मोटापा ख़तरनाक

अधिक शराब पीने से भी यकृत बढ़ जाता है. आंकड़े बताते हैं कि औद्योगिक देशों के 30 प्रतिशत वयस्क लोगों के यकृत शराब के कारण नहीं, अन्य कारणों से सामान्य से बड़े हैं. अधिकतर तो मोटे लोगों के यकृत बड़े और मोटे होते हैं, पर दुबले-पतलों के यकृत भी सामान्य से बड़े हो सकते हैं. अधिक खाने से ही नहीं, फ़ास्ट फूड जैसे गलत खानों और चलने-फ़िरने में कंजूसी से भी यकृत में वसा जमा हो सकती है. इसलिए, विशेषज्ञों की सलाह है कि समय-समय पर डॉक्टर के पास जा कर रक्त परीक्षा और लिवर की अल्ट्रासॉनिक जांच करानी चाहिये. मधुमेह से बचने के लिए डॉ. स्तेफ़ान एक और चीज़ से आगाह करते हैं, "हाल ही में पता चला है और शायद सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है कि फ़्रुक्टोज़ यानी फलशर्करा-- फलों की मिठास – के अधिक सेवन से भी बचना चाहिये. फ़्रुक्टोज़ फलों और फलों के रसों वाले पेय पदार्थों में होता है. फल ज़रूर खायें, पर ऐसे फल, जिन में फ्रुक्टोज़ की मात्रा यानी मिठास कम हो और साथ हरी सब्ज़ियों का अधिक अपयोग करें."

रिपोर्ट- राम यादव

संपादन- आभा मोंढे

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