सेक्स परिवर्तन के लिए बधिया जरूरी नहीं | दुनिया | DW | 12.06.2014
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दुनिया

सेक्स परिवर्तन के लिए बधिया जरूरी नहीं

डेनमार्क की संसद ने सेक्स परिवर्तन करवाने वालों के साथ होने वाले भेदभाव को दूर करने की दिशा में अहम कदम उठाया है. उस कानून को उठा लिया गया है जिसके तहत सेक्स बदलवाने वालों का बधिया कर दिया जाता था.

सेक्स परविर्तन की प्रक्रिया के तहत दूसरे लिंग के तौर पर कानूनी मान्यता के लिए बधिया कराना अनिवार्य था. अब पहली सितंबर से 18 वर्ष से ज्यादा आयु के सभी लोगों को कानूनी सेक्स परिवर्तन के लिए सिर्फ यह कहना होगा कि वे दूसरे सेक्स के हैं. उसके बाद उन्हें छह महीने की सोचने की अवधि से गुजरना होगा, जिसके दौरान वे अपना फैसला बदल सकते हैं. नया लिंग प्रमाणपत्र लेने से पहले उन्हें शारीरिक सेक्स परिवर्तन की प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा.

गृह मंत्री मार्गरेथे वेस्टागर ने कहा, "ट्रांसजेंडर जब कानूनी सेक्स परिवर्तन की वजह से व्यक्तिगत पहचान नंबर लेंगे तो हमने बंध्याकरण की जरूरत समाप्त कर दी है." उन्होंने कहा कि यह जिंदगी को आसान बनाएगा और लोगों के लिए सम्मानजनक भी.

डेनमार्क सरकार का कहना है कि यह कदम कानूनी सेक्स परिवर्तन को आसान बनाने की अंतरराष्ट्रीय रुझान के अनुकूल है. पिछले साल स्वीडन ने भी इसी तरह का एक कानून रद्द कर दिया था. स्वीडन के जिन ट्रांसजेंडर लोगों को सेक्स परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए बधिया कराना पड़ा था, उन्होंने सरकार से मुआवजे की मांग की है.

डेनमार्क में पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर पीआईएन का इस्तेमाल देश के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम में सभी नागरिकों की पहचान के लिए किया जाता है. तनख्वाह पाने से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक हर कहीं इसकी जरूरत पड़ती है.

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने फरवरी में कहा था कि बहुत से यूरोपीय देशों में लोग अपना सेक्स परिवर्तन तभी करा सकते हैं जब वे डॉक्टर से मानसिक डिसऑर्डर का इलाज कराएं, हॉरमोनल इलाज की प्रक्रिया से गुजरें और सर्जरी कराएं जिसका नतीजा बंध्याकरण होता है. इसके अलावा उन्हें यह सबूत भी देना पड़ता है कि वे कुआंरे हैं. अमनेस्टी का कहना है कि ऐसा कर के ये देश करीब 15 लाख ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं.

एमजे/ओएसजे (एएफपी)