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दुनिया

सेक्स के लिए औरतें ना कह सकें तो आएगी बराबरी

दुनिया में गैरबराबरी इसलिए है क्योंकि गरीब औरतों को सेक्स और बच्चा पैदा करने में सहमति या असहमति जताने का हक नहीं मिलता. इसने ना सिर्फ असमानता बढ़ाई बल्कि दुनिया से गरीबी खत्म करने के लक्ष्य को भी पूरा नहीं होने दिया.

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी यूएनएफपीए का कहना है कि दुनिया में असंख्य महिलायें ऐसी हैं जिन्हें सेक्स और बच्चों के जन्म पर अपनी राय जताने का अधधिकार नहीं मिलता. इन महिलाओं के पास स्वास्थ्य सेवायें और परिवार नियोजन की सुविधा भी नहीं होती और अकसर उनका जीवन अनचाहे गर्भ और गर्भपात के खतरे से जूझना पड़ता है. इस हफ्ते जारी यूएनएफपी की सालाना रिपोर्ट 'स्टेट ऑफ द वर्ल्ड पॉपुलेशन' में यह बात कही गयी है. 

बच्चों के जन्म पर अगर महिलाओं का नियंत्रण हो तो वे उसमें देरी कर सकती हैं या फिर दो बच्चों के बीच अंतर को बढ़ा सकती हैं. इससे अर्थव्यवस्था सुधरेगी क्योंकि महिलाएं ज्यादा काम कर सकेंगी, परिवार छोटे होंगे जिसमें मां बाप बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज्यादा खर्च कर सकेंगे.

getöteter Teenager in Syrien (picture alliance / dpa)

आज भी दुनिया की गरीब महिलाओँ को खासतौर से युवतियों, कम पढ़ी लिखी और गांवों में रहने वाली महिलाओं को परिवार नियोजन की सेवायें नहीं मिल पातीं. क्योंकि या तो इनकी कमी है या फिर यह बहुत महंगी हैं. इसके अलावा इन पर इन महिलाओँ के परिवार वालों का दबदबा रहता है. इससे लैंगिक फर्क बढ़ रहा है, अमीर और गरीबों के बीच की खाई बढ़ रही है और इन सबके मिले नतीजे में दुनिया की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिलाओं को प्रजनन से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलन से दुनिया से गरीबी और असमानता को 2030 तक खत्म करने का लक्ष्य भी हासिल नहीं हो पायेगा. यूएनएफपीए की निदेशक नातालिया कानेम ने एक बयान में कहा है, "आज असमानता का मतलब सिर्फ 'जिनके पास है और जिनके पास नहीं हैं' का फर्क नहीं बल्कि 'जो कर सकते हैं और जो नहीं कर सकते हैं' के बीच का फर्क है."

रिपोर्ट ऐसे वक्त में आयी है जब परिवार नियोजन पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अपने खर्च में कटौती का एलान करना शुरू किया है. यूएनएफपीए के शीर्ष दानदाता अमेरिका ने अप्रैल में कहा कि वह इस एजेंसी के लिए धन देना बंद कर देगा. 2016 में अमेरिका ने 6.9 करोड़ डॉलर इस काम के लिए दिये थे. डॉनल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद सबसे पहले किये कामों में इस फंड पर रोक लगाना भी शामिल था.

अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं ने परिवार नियोजन के लिए धन में कमी को पूरा करने का फैसला किया है और करीब 20.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रकम जुटाने में मदद की है. हालांकि एजेंसी का कहना है कि अभी भी 2020 तक के लिए कम से कम 70.0 करोड़ अमेरिकी डॉलर की कमी है. इसका नतीजा खासतौर से गांव की महिलाओं पर पड़ सकता है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है. दुनिया के विकासशील देशों में कम से कम 21.4 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जिनकी पहुंच में गर्भनिरोधक नहीं है. इसका नतीजा हर साल करीब 8.9 करोड़ अनचाहे गर्भ और करीब 4.8 करोड़ गर्भपात के रूप में सामने आता है.

कंबोडिया, सेनेगल और रवांडा ने 2005 के बाद गर्भनिरोधकों की सुविधा बढ़ा कर गरीब महिलाओं के मौत की संख्या पर रोक लगाने में कामयाबी पायी है. प्रजनन से जुड़ी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा हर साल करीब 430 अरब डॉलर का आर्थिक लाभ करा सकती है. आंकड़े बताते हैं कि परिवार नियोजन पर खर्च होने वाला एक डॉलर से छह डॉलर की बचत होती है. यह बचत स्वास्थ्य और दूसरी सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च में आयी कमी से होती है.

(सोनी वर्ल्ड फोटोग्राफी 2017 के विजेता)

एनआर/ओएसजे (एएफपी)

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