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दुनिया

सूचना लीक करने पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी से नाराज ब्रिटेन

ब्रिटिश पुलिस मैनचेस्टर हमले के पीछे के जिहादी नेटवर्क की तलाश में जुटी है. इस बीच जांच रिपोर्ट के लीक होने पर ब्रिटेन और अमेरिका के बीच ठन गई है. लीक के बाद ब्रिटेन ने अमेरिका को खुफिया सूचनाएं देना रोक दिया है.

मैनचेस्टर के आत्मघाती हमले से जुड़ी संवेदनशील सूचना लीक करने पर ब्रिटेन अमेरिकी खुफिया एजेंसी से नाराज है. गुरुवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरीजा मे इस मुद्दे को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से बातचीत में उठाने वाली हैं. ब्रिटिश पुलिस को अब भी किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश है जिसने संभवत: उस हमले के लिए बम बनाया होगा. जांचकर्ताओं को लगता है कि अमेरिकी लीक के कारण अपराधियों की उनकी तलाश पर बुरा असर पड़ेगा.

जुलाई 2005 में बाद से ब्रिटेन में सबसे जानलेवा आतंकी हमले के मुख्य हमलावर की पहचान कर ली गयी थी लेकिन सलमान आबेदी के साथियों की तलाश जारी है. ब्रिटिश मंत्री और सुरक्षा प्रमुख इस बात से बहुत निराश हैं कि अमेरिकी मीडिया ने ब्रिटिश जांच प्रक्रिया से जुड़ी कई संवेदनशील जानकारियां प्रकाशित कर दीं. न्यू यॉर्क टाइम्स ने घटना स्थल की कई तस्वीरें प्रकाशित कीं जिनमें बम के बचे हुए हिस्से की तस्वीरें भी शामिल थीं. मैनचेस्टर एरीना में हुए आत्मघाती हमले में 22 लोगों की मौत हो गयी और 60 के करीब लोग घायल हैं.

गुरुवार को ब्रसेल्स में नाटो की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति और ब्रिटिश प्रधानमंत्री की मुलाकात होगी. बीबीसी ने खबर दी है कि ब्रिटिश पुलिस ने अमेरिका के साथ इस बारे में सूचना का आदान प्रदान रोक दिया है. इस बीच ब्रिटिश पुलिस ने दो लोगों को हमले से संबंधित होने के संदेह में गिरफ्तार किया है, जिन्हें मिलाकर कुल गिरफ्तार लोगों की संख्या आठ हो गयी है. ब्रिटेन अमेरिका को अपना सबसे करीबी रक्षा और सुरक्षा सहयोगी मानता है. दोनों देशों के खुफिया विभाग में जानकारियों का आदान प्रदान भी होता है और वे "फाइव आइज" नेटवर्क का हिस्सा भी हैं, जिसमें उनके अलावा तीन अन्य देश ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड शामिल हैं.

ब्रिटिश खुफिया विभाग जर्मनी के खुफिया विभाग का सहयोग भी ले रहा है. जानकारी मिली है कि हमलावर चार दिन पहले ही जर्मन शहर डुसेलडॉर्फ में था.

आरपी/एमजे (रॉयटर्स, डीपीए)

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