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दुनिया

सुरक्षा सम्मेलन से पहले रूसी झटका

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में सीरिया पर एकराय बनाने की कोशिशों को पहले ही झटका लग गया. रूस ने साफ कर दिया कि सीरिया के मुद्दे पर सम्मेलन के दौरान किसी तरह की अनौपचारिक बातचीत नहीं होगी.

अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों को उम्मीद थी कि सीरिया के मुद्दे पर म्यूनिख में रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावारोव से बातचीत की जाएगी. इसी उम्मीद में सीरियाई विपक्षी गठबंधन के अध्यक्ष मोआज अलखातिब भी जर्मनी पहुंचे. मीडिया में रूस के साथ बातचीत तय होने की रिपोर्टें भी जारी हो गईं, लेकिन कुछ देर बाद ही रूस के उप विदेश मंत्री गेनेडी गाटिलोव ने इन रिपोर्टों का खंडन कर दिया.

गाटिलोव ने कहा, "आज की बात करें तो रूस के विदेश मंत्री के कार्यक्रम में ऐसी किसी मुलाकात का जिक्र नहीं है. म्यूनिख में लावरोवस-बाइडेन-ब्राहिमी और सीरियाई विपक्ष के प्रतिनिधी अलखातिब के मिलने की मीडिया रिपोर्टों में सच्चाई नहीं है." लखदर ब्राहिमी संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग के सीरिया दूत हैं.

अगर सीरिया के मुद्दे पर किसी तरह की मीटिंग हुई तो पहले रूसी विदेश मंत्री सीरियाई विपक्षी गठबंधन के अध्यक्ष अलखातिब से मिलेंगे. दिसंबर में अलखातिब ने मॉस्को का निमंत्रण ठुकरा दिया था. तब अलखातिब ने रूस पर असद के समर्थन का आरोप भी लगाया और मॉस्को से माफी मांगने को भी कहा. ऐसे में बहुत कम संभावना है कि रूसी विदेश मंत्री से सीरियाई विपक्ष को कोई अच्छी खबर मिले.

सीरिया में मार्च 2011 में राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ प्रदर्शन हुए. कुछ महीने बाद प्रदर्शन हथियाबंद लड़ाई में तब्दील हो गए. विद्रोही अब सीधे सेना से मुकाबला कर रहे हैं. वे सीरिया के कुछ इलाकों को अपने नियंत्रण में ले चुके हैं. बीते दो साल से जारी संघर्ष में अब तक 60,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. पश्चिमी देशों का आरोप है कि असद आम नागरिकों के खिलाफ सेना का प्रयोग कर रहे हैं. वहीं असद का आरोप है कि आतंकवादी विपक्ष की मदद से सीरिया को तबाह करना चाह रहे हैं.

रूस मान रहा है कि सीरिया में असद की ताकत कमजोर पड़ती जा रही है. साथ ही रूस यह भी कह रहा है कि सीरिया पर किसी भी तरह की बातचीत से पहले असद को सत्ता से हटाने की शर्त नहीं रखी जानी चाहिए.

49वें म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में माली पर भी चर्चा होगी. माली में तीन हफ्तों से फ्रांस और अफ्रीकी संघ की सेनाएं सैन्य अभियान छेड़े हुए हैं. फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरां फाबिउस और रक्षा मंत्री जां यीव्स ले द्रियां म्यूनिख में माली सैन्य अभियान की जानकारी देंगे. माली के अलावा ईरान के विदेश मंत्री अली अकबर सालेही पर भी म्यूनिख में नजरें रहेंगी.

Merkel und Biden Archivbild 07.02.2009

जर्मनी पहुंचे बाइडेन

सम्मेलन में हिस्सा लेने वाली सबसे प्रमुख हस्ती अमेरिकी उप राष्ट्रपति जो बाइडेन हैं. शुक्रवार सुबह अमेरिकी उप राष्ट्रपति का विमान जर्मनी की राजधानी बर्लिन में उतरा. सम्मेलन से पहले ही बाइडेन ने जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल से मुलाकात की. दोनों नेताओं की मुलाकात में ही सुरक्षा सम्मेलन का एजेंडा तय हो गया. माना जा रहा है कि म्यूनिख में अमेरिकी उप राष्ट्रपति ओबामा के दूसरे कार्यकाल में अमल में लाई जाने वाली अमेरिकी विदेश नीति की भी चर्चा करेंगे. नाटो के महासचिव जनरल आंद्रेस फो रासमुसेन भी सम्मेलन को संबोधित करेंगे.

चांसलर मैर्केल और उनकी कैबिनेट के अलावा जर्मनी के 60 सांसद सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. 49वें सुरक्षा सम्मेलन में इस बार बीते सालों के मुकाबले ज्यादा प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. बीते 50 साल से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित बड़े फैसले म्यूनिख में ही होते आ रहे हैं.

ओएसजे/एजेए (डीपीए, रॉयटर्स, एपी)

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