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दुनिया

सुरक्षा परिषद में सुधार का केंद्र होगा भारतः अमेरिका

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों में भारत का नाम जुड़ने के आसार बढ़ गए हैं क्योंकि अमेरिका ने कहा है कि सुरक्षा परिषद के सुधारों में भारत की मुख्य भूमिका होगी. स्थायी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार होता है.

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सुरक्षा परिषद

अमेरिका के राजनीतिक मामलों के उप विदेश मंत्री बिल बर्न्स ने व्हाइट हाउस में बुलाई गई एक खास प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों से यह बात कही. बिल ने कहा, "भारत के विकास और इसके बढ़ते महत्व को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार का केंद्र भारत होगा." इस मामले में जब उनसे और ब्यौरा देने को कहा गया तो बिल ने कहा, "इस मुद्दे के बारे में फिलहाल मैं इतना ही कह सकता हूं."

बर्न्स का कहना है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय ताने बाने का महत्व समझता है. अमेरिका यह भी जानता है कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद को 21वीं सदी की सच्चाइयों को अपने भीतर जगह देनी होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति नवंबर के पहले हफ्ते में भारत यात्रा पर जा रहे हैं उम्मीद है कि उनसे इस मुद्दे पर भी चर्चा होगी.

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत को चुना गया है. चुनाव में भारत को दुनिया के कोने कोने से रिकॉर्ड वोट मिले. भारत के साथ जर्मनी को भी अस्थायी सदस्य चुना गया है. भारत के लिए मुद्दा अब सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता है जिसकी मांग लंबे समय से हो रही है. फिलहाल सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं. इनमें अमेरिका के अलावा रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं. सुरक्षा परिषद में वीटो का अधिकार सिर्फ इन्हीं देशों के पास है.

पूरी दुनिया मानती है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विकसित देशों की तूती बोलती है. इसके लिए सुरक्षा परिषद के ढांचे में बदलाव कर कुछ और देशों को स्थायी सदस्य बनाने की मांग हो रही है. स्थायी सदस्य बनने की होड़ में भारत के अलावा ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी और जापान भी शामिल हैं. सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग के लिए जापान, जर्मनी, भारत और ब्राजील ने जी4 के नाम से एक गुट भी बनाया है. इन देशों ने स्थायी सदस्यता के मामले में एक दूसरे का समर्थन करने की बात कही है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः ए कुमार

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