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जर्मन चुनाव

सुरक्षा परिषद में ईरान प्रतिबंध पर मतदान

परमाणु विवाद पर बातचीत रोकने की ईरान की चेतावनी के बावजूद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार को ईरान के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंधों पर मतदान हो रहा है. विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम पर पश्चिमी देशों के निशाने पर है ईरान.

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पर्दे के पीछे महीनों की सौदेबाज़ी के बाद इस महीने सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहे मैक्सिको के दूत क्लोद हेलर ने कहा है कि ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने वाले प्रस्ताव के मसौदे पर बुधवार दस बजे सुबह (भारतीय समय के अनुसार शाम साढ़े सात बजे) मतदान होगा. इक्वाडोर का दौरा कर रही अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने मतदान के एक दिन पहले पत्रकारों से कहा, "मैं समझती हूं कि यह सबसे महत्वपूर्ण प्रतिबंध हैं जिनका ईरान ने अब तक सामना किया है."

Iran Natanz

प्रस्ताव का समर्थन छह देश कर रहे हैं. सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन और रूस के अलावा प्रस्ताव लाने वाले देशों में जर्मनी भी शामिल है. उनका कहना है कि प्रस्ताव पारित कराने के लिए ज़रूरी 9 वोट से अधिक समर्थन है. पिछले चार सालों में ईरान के ख़िलाफ़ यह चौथा प्रतिबंध होगा जिसका लक्ष्य उसे परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए बाध्य करना है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब तक ईरान की परमाणु महात्वाकांक्षा पर लगाम लगाने में विफल रहा है.

ईरान का कहना है कि उसका यूरेनियन संवर्धन कार्यक्रम शांति उद्देश्यों के लिए है जबकि पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार का विकास करना चाहता है. अमेरिका द्वारा तैयार मसौदे में पिछले तीन प्रस्तावों में लगाए गए प्रतिबंधों को बढ़ाया जा रहा है. इसमें हथियारों की ख़रीद पर प्रतिबंध में विस्तार और बैंकों पर प्रतिबंध के अलावा 40 संस्थानों पर यात्रा और वित्तीय प्रतिबंध लगाना शामिल है.

ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने चेतावनी दी है कि यदि नए प्रतिबंध लगाए जाते हैं तो देश के संदिग्ध परमाणु कार्यक्रम पर छह देशों के साथ चल रही बातचीत रोक दी जाएगी. रूसी प्रधानमंत्री व्लादीमिर पुतिन ने कहा है कि प्रतिबंध ज़्यादा कठोर नहीं होने चाहिए. अमेरिकी की संयुक्त राष्ट्र दूत सूजन राइस ने कहा है कि अमेरिका को अभी भी उम्मीद है कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए मनाया जा सकेगा.

ब्राजील और तुर्की ने सुरक्षा परिषद में मतदान से पहले खुली बहस की मांग की है ताकि वे अपनी बात रख सकें कि प्रतिबंधों का उल्टा असर होगा. मसौदे में ईरान के साथ समझौते के लिए दोनों देशों की प्रयासों की चर्चा की गई है, लेकिन यह साफ नहीं है कि ब्राज़ील, तुर्की और लेबनान प्रस्ताव के पक्ष में मत देंगे या मतदान में भाग नहीं लेंगे.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: एस गौड़

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