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जर्मन चुनाव

सुरक्षा परिषद: भारत की सीट पक्की

19 साल बाद भारत एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य बनने जा रहा है. मंगलवार को होने वाले चुनाव में उसे परिषद की अस्थायी सदस्यता मिलनी तय हो गई है.

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कजाकिस्तान ने खुद को दौड़ से बाहर कर लिया है इसलिए भारत के सामने अब इस क्षेत्र से कोई और प्रतिद्वन्द्वी नहीं है. इस तरह अब एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका की सीटों का फैसला बिना किसी चुनाव के ही हो जाएगा. हालांकि पश्चिमी यूरोप और अन्य इलाकों वाली कैटिगरी में तगड़ा मुकाबला है. यहां कनाडा, जर्मनी और पुर्तगाल चुनाव मैदान में हैं.

अफ्रीकी सीट पर दक्षिण अफ्रीका का चुना जाना तय है. इस तरह भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका तीनों एक ही वक्त में सुरक्षा परिषद में साथ होंगे. संयुक्त राष्ट्र के बाहर भी ये तीनों सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाएं एक मंच पर नजर आती रही हैं. चीन के साथ मिलकर इन्हें ब्रिक देश कहा जाता है और पर्यावरण के मुद्दों पर चारों ताकतों ने कई बार हाथ मिलाए हैं. संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि हरदीप सिंह इसे एक अहम कदम मानते हैं. वह कहते हैं, "सुरक्षा परिषद में ब्रिक देशों का सहयोग अब एक अहम तथ्य बन चुका है."

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की सीट के लिए भारतीय राजनयिक पिछले तीन साल से माहौल बना रहे हैं. जीतने के लिए भारत को महासभा के दो तिहाई सदस्यों की वोटों की जरूरत है. पिछली बार वह 1992 में संयुक्त राष्ट्र में रहा. अब भारत के लिए सदस्यता काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि वह सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए कोशिश कर रहा है. उसका मकसद सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हासिल करना है.

इस वक्त चार देश इसकी स्थायी सदस्यता की कोशिश कर रहे हैं. अगर जर्मनी भी मंगलवार को होने वाले चुनाव में सीट जीतने में कामयाब रहता है तो ये चारों देश भारत, ब्राजील, जापान और जर्मनी परिषद में एक साथ होंगे.

चुनावों के बाद परिषद में पांच नए सदस्य होंगे. ये ऑस्ट्रिया, जापान, मेक्सिको, तुर्की और युगांडा की जगह लेंगे. मेक्सिको की जगह कोलंबिया के आने की संभावनाएं हैं. नए सदस्यों का कार्यकाल अगले साल पहली जनवरी से शुरू होगा.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ओ सिंह

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