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दुनिया

सुप्रीम कोर्ट से सज्जन को झटका

1984 के सिख विरोधी दंगों के आरोपी सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने झटका दिया. सर्वोच्च अदालत ने कांग्रेस नेता के खिलाफ सुल्तानपुरी में हुई हिंसा के मुकदमे को खारिज करने से इनकार कर दिया.

निचली अदालत और दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सज्जन कुमार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. मंगलवार को इस पर फैसला आया. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एके पटनायक की अगुवाई वाली बेंच ने सज्जन कुमार के खिलाफ निचली अदालतों के फैसलों पर रोक लगाने से इनकार किया. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद दिल्ली के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के खिलाफ सिख विरोधी दंगे का एक और मुकदमा चलेगा.

मंगलवार को अदालत ने दूसरे आरोपियों वेद प्रकाश और ब्रह्मानंद गुप्ता की अपील भी खारिज कर दी. 1984 के दंगों के दौरान दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में हत्याएं हुईं. जुलाई 2010 में निचली अदालत ने इस मामले में सज्जन कुमार, ब्रह्मानंद गुप्ता, पेरु, कुशल सिंह और वेद प्रकाश के खिलाफ हत्या और दंगे समेत कई आरोप तय किये. इस मुकदमे को रद्द करवाने के लिए आरोपी पहले दिल्ली हाई कोर्ट गए और वहां राहत न मिलने पर उन्होंने सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया.

अपील पर फैसला करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर निचली अदालत को पुख्ता ढंग से यह शक हो रहा है कि आरोपी अपराध में शामिल है तो उन पर आरोप तय किये जा सकते हैं.

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में सिख विरोधी दंगे भड़के. कांग्रेस के कुछ नेताओं पर हत्या, साजिश रचने, दंगे भड़काने और दो समुदायों के बीच घृणा फैलाने के आरोप लगे. सिख विरोधी दंगों के बाद उत्तर भारत ने लंबे समय तक सिख आतंकवाद का दौर देखा.

लंबे वक्त बाद 2005 में जस्टिस जीटी नानावटी आयोग ने सिख विरोधी दंगों के मामले में सुझाव दिए. सुझावों के आधार पर सीबीआई ने नए सिरे से जांच शुरू की. सज्जन कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ सीबीआई जनवरी 2010 में भी दो आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है.

ओएसजे/एमजी (पीटीआई)

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