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खेल

सुपर सीरीज जीतना नंबर एक होने जैसा

भारत की सर्वश्रेष्ठ बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल को दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनने की जल्दी नहीं है. सायना का कहना है कि हांगकांग सुपर सीरीज का खिताब जीतना उनके लिए नंबर एक खिलाड़ी बनने जैसा ही है.

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अपने प्रदर्शन से खुश हैं सायना

सायना के मुताबिक खिताबी जीत तक के सफर में उन्होंने दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों को हराया इसलिए नंबर एक खिलाड़ी बनना और हांगकांग सुपर सीरीज जीतना एक ही बात है. सायना के लिए 2010 एक सपनीला साल साबित हुआ है जिसमें उन्होंने सफलता के नए प्रतिमान कायम किए हैं. साल के आखिर में हांगकांग सुपर सीरीज की जीत सायना को दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी का ताज नहीं दिला पाएगा.

लेकिन सायना इसे ज्यादा अहमियत नहीं दे रही हैं. वह कहती हैं, "अगर मुझे नंबर एक रैंकिंग मिल जाती तो मुझे बहुत खुशी होती. मुझे अभी रैंकिंग का सिस्टम नहीं पता और मैं नहीं जानती कि मेरी रैंकिंग क्या होगी. मुझे लगता है कि इस साल मैं नंबर तीन या चार खिलाड़ी बनी रहूंगी लेकिन ऐसे बड़े खिताब जीतना मेरे लिए नंबर एक खिलाड़ी होने जैसा ही है."

सायना ने भरोसा जताया है कि वह टॉप खिलाड़ी का ताज अगले साल अपने सिर पहनेंगी. सायना नेहवाल ने इस साल लगातार तीन खिताब जीते. चेन्नई में इंडियन ओपन ग्रां प्री, सिंगापुर सुपर सीरीज और फिर इंडोनेशिया सुपर सीरीज. सायना ने दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया लेकिन चीन में एशियाई खेलों में वह ज्यादा आगे नहीं जा सकी.

अब हांगकांग सुपर सीरीज का खिताब जीतकर सायना ने साल का धमाकेदार अंत किया है. सायना भी मानती हैं कि 2010 उनके लिए खास रहा है. वह कहती हैं, "मेरे लिए यह साल सपने जैसा रहा. मैंने 12 में से 5 सुपर सीरीज टूर्नामेंट में हिस्सा लिया जिनमें तीन में मैंने बढ़िया प्रदर्शन किया. एक सुपर सीरीज के सेमीफाइनल में मेरी हार हुई. कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतना तो यादगार लम्हा रहा."

सायना के मुताबिक पद्मश्री और खेल रत्न अवॉर्ड पाने से उन्हें बेहद खुशी है और एक खिलाड़ी इससे ज्यादा और क्या चाहेगा. सायना ने अपनी सफलता के लिए कोच पुलेला गोपीचंद और भास्कर बाबू का शुक्रिया अदा किया है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: ए कुमार

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