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खेल

सुंदरता देख कर बोलो

टेनिस में सुंदरियों के खेल के साथ उनके हुश्न का सुर्खियों में आना अकसर होता है लेकिन कई बार यह भारी भी पड़ जाता है. बीबीसी के एक कमेंटेटर ने विंबलडन विजेता मारियो बारतोली के रूप की चर्चा कर यही गलती कर दी.

प्रेम और निजी संबंधों की सुर्खियों के साथ शुरू हुआ इस बार का विंबलडन खत्म हुआ तो भी विवाद के साथ. बीबीसी के एक कमेंटेटर टाइटल विजेता मारियन बारतोली की खेल तकनीक पर चर्चा करते करते उनके रूप के बारे में कुछ ज्यादा कह गए.

जर्मन खिलाड़ी सबीने लिसिकी को हराने के पहले ही मारियो बारतोली के बारे में चर्चा तेज हो गई थी. लिंडसे डेवेनपोर्ट के साथ बारतोली की खेल तकनीक पर चर्चा करते करते जॉन इनवर्डेल कह गए, "क्या आप सोचती हैं कि जब बारतोली बच्ची रही होंगी तो उनके पिता ने उनसे कहा होगा, तुम सुंदर नहीं हो, तुम्हें कोई शारापोवा की तरह नहीं देखेगा इसलिए तुम्हें बहादुर बनना है, लड़ना है." जाहिर है कि बीबीसी और इनवर्डेल ने माफी मांग ली है. बीबीसी के दफ्तर में सैकड़ों लोगों ने फोन कर शिकायत की.

इस तरह के बयानों पर अकसर मशहूर हस्तियां आपा खो बैठती हैं लेकिन बारतोली ने बड़े शानदार तरीके से और गरिमा के साथ जवाब दिया. विजेताओं के लिए खास रात्रिभोज में बारतोली किसी मॉडल की तरह पहुंचीं. एक ब्रिटिश अखबार ने इसके बारे में लिखा है, "उनके लहराते काले बाल... बदन से चिपकी काली ड्रेस...और घुटनों तक जाते आसमान छूती ऊंचाई वाली एड़ी के जूते." इसके बाद बारतोली ने कहा, "मैं इस पत्रकार को आमंत्रित करती हूं कि वो आकर मुझे इस इवनिंग बॉल गाउन और हील्स में देखे, और मेरा ख्याल है कि वह अपनी राय बदल सकते हैं."

इनवर्डेल के कमेंट के बारे में जब बारतोली के पिता डॉ वाल्टर बारतोली से पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं नाराज नहीं हूं. वह मेरी सुंदर बेटी है. मारियन और मेरे बीच रिश्ता हमेशा अविश्वसनीय रहा है और इसलिए मुझे नहीं पता कि यह रिपोर्टर किसके बारे में बात कर रहा है." वाल्टर बारतोली मारियन के पहले कोच हैं और उनका स्टाइल डॉ वाल्टर की ही देन है. बारतोली काफी आक्रामक हो कर खेलती हैं लेकिन बहुत तेज नहीं. वाल्टर ने जोर देकर मारियन को दोनों हाथ से दोनों तरफ शॉट मारने के लिए तैयार किया है. कोई 20 साल पहले इसी खूबी के दम पर मोनिका सेलेस टेनिस के शिखर पर पहुंचीं थीं.

बारतोली ने पिछले पखवाड़े भर में एक भी सेट नहीं गंवाया और इसकी अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि तमाम दिग्गज इस मुकाबले में धराशायी हो गए. इनमें शारापोवा भी थीं जो खाली समय में मॉडलिंग करती हैं.

पुरानी आदतें जल्दी छूटती नहीं हैं और फाइनल मुकाबले में सबीने लिसिकी को हराने में अकसर वह अपने पिता की ओर देखती नजर आईं. इसमें कोई शक नहीं कि वाल्टर ने बारतोली को कभी कहा था, "बहादुर बनो और लड़ो" इनवर्डेल ने यह हिस्सा तो सही उठाया था. बहुत से खिलाड़ी करियर के दौरान ऐसी बातें अपने मां बाप से सुनते हैं. इसके बाद इनवर्डेल ने जो कहा वह जरूर सीमाएं लांघ गया.

एनआर/एमजे(एपी)

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