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दुनिया

सीरिया सरकार और विरोधियों के बीच सीधी बातचीत नहीं होगी

अब तक 3,10,000 लोग मारे जा चुके हैं. आधी आबादी विस्थापित हो चुकी है. सीरिया में छह साल से जारी संघर्ष को रोकने के लिए अब रूस और तुर्की नई कोशिश कर रहे हैं.

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के प्रतिनिधि और विपक्षी नेता कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना पहुंचे हैं. अभी यह पता नहीं चला है कि दोनों खेमे सीधे एक दूसरे से संवाद करेंगे या फिर किसी तीसरे पक्ष का सहारा लेंगे. बीते साल संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुई बातचीत की कोशिश नाकाम होने के बाद पहली बार सीरिया सरकार और उसके विरोधी एक मेज पर आए हैं.

बातचीत शुरू होने से पहले कजाखस्तान के उप विदेश मंत्री रोमान वासिलेन्को ने कहा कि दोनों पक्ष सीधी बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं. सीरिया में 2011 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद हिंसा शुरू हुई और देखते ही देखते गृह युद्ध छिड़ गया. तब से लेकर अब तक सरकार और विद्रोहियों के बीच सीधी बातचीत नहीं हुई है.

अब रूस, तुर्की और ईरान बातचीत करवा रहे हैं. सीरिया के सबसे बड़े शहर अलेप्पो पर सेना के नियंत्रण के बाद यह बातचीत होने जा रही है. हालांकि मंगलवार दोपहर तक चलने वाली इस बातचीत से आयोजकों को भी बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं. सीरिया सरकार की तरफ से कोई भी बड़ा अधिकारी अस्ताना नहीं पहुंचा है.

(देखिये हिंसा के चलते क्या से क्या हो गया अलेप्पो)

अलग अलग लक्ष्य

विपक्षी खेमे और सीरिया सरकार के बीच कई मतभेद हैं. दोनों पार्टियों के लक्ष्य भी एक दूसरे से अलग हैं. विद्रोही मानवीय मदद को आधार बनाना चाहते हैं. वे दिसंबर 2016 में रूस और तुर्की की मध्यस्थता से हुए संघर्ष विराम के कथित उल्लंघन का मुद्दा भी उठाना चाहते हैं. विरोधी पक्ष के प्रवक्ता याहया अल अरिदी कहते हैं, "हम किसी राजनीतिक बातचीत में नहीं जाएंगे और सब कुछ संघर्ष विराम व बंदी के चलते पीड़ा झेल रहे सीरियाई लोगों की मानवीय मदद और हिरासत में लिये गए लोगों की रिहाई व राहत सामग्री पहुंचाने के इर्द गिर्द होगा."

दूसरी ओर राष्ट्रपति असद की मांग है कि माफी की डील तक पहुंचने के लिए विद्रोहियों को हथियार डालने होंगे. वह विवाद का राजनीतिक हल खोजने पर भी जोर दे रहे हैं. रविवार को रूस, तुर्की और ईरान के राजनयिक अस्ताना के होटल में मिले. रूस सीरिया सरकार की मदद कर रहा है तो तुर्की विद्रोहियों के साथ खड़ा है. बैठक में हिस्सा लेने के लिए यूएन के विशेष सीरिया दूत स्टाफान दे मिस्तुरा भी कजाखस्तान पहुंचे हैं.

इस बातचीत में पश्चिमी देशों का कोई प्रतिनिधि नहीं है. हालांकि डॉनल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद मॉस्को को सीरिया विवाद के हल की उम्मीद है. रूस ने आखिरी पलों में अस्ताना वार्ता के लिए ट्रंप को भी निमंत्रण दिया.

(क्या है सीरिया का संकट)

ओएसजे/वीके (एएफपी, रॉयटर्स)

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