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खबरें

सीरिया में लड़ते पाकिस्तानी

सुलेमान ने कई सालों तक अपने देश पाकिस्तान में शियाओं को निशाना बनाया है. अब उसे सीरिया से बुलावा आया है, जहां उसने सुन्नी विद्रोहियों का साथ देने का फैसला कर लिया है. वे, जो राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ लड़ रहे हैं.

सुलेमान इस गफलत में है कि किसी का खून बहाने के बावजूद उसे जन्नत में जगह मिलेगी. छोटे कद का सुलेमान अपना पूरा नाम बताने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि उसे डर है कि कहीं अफसर उसके पीछे न पड़ जाएं. वह उन कई लोगों में शामिल हो चुका है, जो सीरिया की लड़ाई को एक नया मोड़ दे रहे हैं.

अमेरिका जैसे देशों के लिए यह और भी परेशानी का सबब है, जो विद्रोहियों को हथियार मुहैया कराना चाहते हैं. अगर ऐसा हुआ, तो हो सकता है कि अमेरिका के दुश्मनों के हाथों में ही अत्याधुनिक हथियार चले जाएं. सीरिया में लड़ रहे ज्यादातर विदेशी लड़ाके अरब के दूसरे देशों से आए हैं, जिनमें इराक के अल कायदा हैं, जो सुन्नी विद्रोही हैं और सरकार के खिलाफ हैं, जबकि हिजबुल्लाह के लड़ाके भी हैं, जो शिया हैं और सरकार का साथ दे रहे हैं.

सीरिया के टेढ़े हालात

अब पाकिस्तान से लड़ाकों के जाने से वहां नई स्थिति पैदा हो गई है. पाकिस्तान के अधिकारी इस बात से इनकार कर रहे हैं कि उनके यहां से चरमपंथी सीरिया जा रहे हैं. लेकिन अफगानिस्तान में तैनात पाकिस्तानी खुफिया इदारे के अफसरों का कहना है कि ऐसा हो रहा है. उन्होंने बताया कि अल कायदा और पाकिस्तानी तालिबान के अलावा सुलेमान के लश्कर ए जंगवी ग्रुप से भी लड़ाके सीरिया जा रहे हैं.

इन अफसरों ने अपना नाम छिपाते हुए बताया कि पाकिस्तान से जाने वालों में उजबेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के लोग भी शामिल हैं, जो पाकिस्तान में भी अमेरिका के खिलाफ संघर्ष में हिस्सा ले रहे थे. अफसर के मुताबिक इन लोगों का मानना है कि "सीरिया का युद्ध बेहद अहम मोड़" पर पहुंच गया है.

अल कायदा की ट्रेनिंग

इस ग्रुप में अल कायदा के सदस्यों की खास हिस्सेदारी है, जो पाकिस्तान के तालिबान और दूसरे लड़ाकों को बम बनाने और दूसरी आतंकवादी ट्रेनिंग देने का काम करते हैं. ये गुट और सरकार दोनों में से कोई भी यह नहीं बता पाया कि पाकिस्तान के कितने लोग सीरिया में लड़ रहे हैं, न ही उन्होंने यह बताया कि वे किस रास्ते से वहां पहुंचे हैं.

सीरिया के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता मुहम्मद कनान का कहना है कि वे इस बात की तसदीक कर सकते हैं कि उनके इलाके में पाकिस्तानी लड़ रहे हैं लेकिन वे बहुत बड़ी संख्या में नहीं हैं, "ज्यादातर मुजाहिदीन अरब देशों के हैं, जिनमें ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, इराक और सऊदी अरब के लड़ाके शामिल हैं. लेकिन हाल में हमने पाकिस्तानी और अफगान को भी देखा है."

खेप दर खेप

पाकिस्तानी तालिबान के सदस्य होने का दावा करने वाले हमजा ने बताया कि दूसरी खेप में उनके और लश्कर ए जंगवी के सदस्य सीरिया जा रहे हैं. हमजा का कहना है कि पाकिस्तानी अधिकारी उन पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं और ऐसे में पाकिस्तान के अंदर उनकी कार्रवाइयों पर अंकुश लग गया है और सीरिया जाकर वे "अपना काम बढ़ाना" चाहते हैं.

इन लोगों में वे भी शामिल हैं, जिन्हें पहले किसी आतंकवादी कार्रवाई की वजह से हिरासत में लिया जा चुका है. इस ग्रुप में सुलेमान का गुट भी शामिल है, जिसे लाहौर में 2009 के हमलों के बाद हिरासत में लिया गया.

समाचार एजेंसी एपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीरिया जाने से हफ्ते भर पहले उसने इंटरव्यू दिया, जिसमें कहा, "हमारा लक्ष्य शियाओं के खिलाफ लड़ना और उन्हें मिटा देना है."

हमजा का कहना है कि लश्कर ए जंगवी और पाकिस्तानी तालिबान मिल कर इस काम में लगा है और दूसरी खेप में 70 लड़ाकों को सीरिया भेजा गया है. ये आतंकवादी बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वाह और कराची जैसे शहरों से जमा हुए हैं.

उसका कहना है कि वह खुद भी 40 लोगों की टुकड़ी का हिस्सा है, जिसे आने वाले हफ्तों में सीरिया रवाना होना है. हमजा के मुताबिक उसे अभी नहीं पता कि किस गुट के साथ मिल कर उसे सीरिया में लड़ना है. उसका कहना है कि इस काम में लगे लोगों में लश्कर ए जंगवी का नेता उस्मान गनी और तालिबान का प्रमुख सदस्य अलीमुल्लाह उमरी शामिल है.

परिवार भी साथ

हमजा का दावा है कि कई लोग तो अपने परिवारों को भी साथ ले जा रहे हैं. उसके मुताबिक वे पहले समुद्री रास्ते से ओमान की राजधानी मस्कत पहुंचते हैं और बाद में सीरिया के लिए कूच कर जाते हैं. वहीं दूसरे पहले श्रीलंका, बांग्लादेश या यूएई की उड़ान भरते हैं और उसके बाद सीरिया की ओर रवाना होते हैं. उसका दावा है कि संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन से उन्हें खूब पैसा मिल रहा है.

उसके मुताबिक सुलेमान ने फर्जी पासपोर्ट की मदद से सूडान की उड़ान भरी और वहां अपना परिवार छोड़ दिया. उसके बाद वह सीरिया जा रहा है. कुछ और पाकिस्तानियों ने अपने परिवार सूडान में छोड़े हैं.

रिपोर्टः रसूल दावर/जायना कराम (एपी)/एजेए

संपादनः आभा मोंढे

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