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दुनिया

सीरिया में घेराबंदी खत्म करने की मांग

सीरिया में घेराबंदी के शिकार शहर मदाया में महीनों बाद पहली बार राहत सामग्री पहुंचने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भूखमरी के खतरे में पड़े 400 लोगों को वहां से बाहर निकाले जाने की जरूरत है.

संयुक्त राष्ट्र राहत संगठन यूएनएड के प्रमुख स्टेफान ओब्रायन ने कहा है कि राहतकर्मियों को मदाया के अस्पताल में पहुंचने पर 400 लोग मिले जो भूखमरी, कुपोषण और बीमारियों के शिकार हैं. सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद ओब्रायन ने कहा, "वे जान जाने के खतरे में हैं." संयुक्त राष्ट्र ने सीरिया की सरकार और मदाया जाने के रास्ते को कंट्रोल करने वाले सशस्त्र गुटों से इन लोगों को मदाया से बाहर निकाले जाने की अनुमति देने को कहा है. इससे पहले भूख से जर्जर बच्चों की तस्वीरें सामने आने के बाद सोमवार को खाने पीने और दूसरी जरूरी सामग्री लेकर 44 ट्रकों का काफिला मदाया पहुंचा था. शहर को राष्ट्रपति बशर अल असद के सैनिकों ने छह महीने से घेर रखा है. 21ट्रक विद्रोहियों द्वारा घेरे गए दो शहरों फुआ और काफराया भेजे गए.

सुरक्षा परिषद ने अपनी बैठक में मदाया की स्थिति पर चर्चा की जहां के लोगों का कहना है कि वे जीने के लिए घास खाने और बिल्ली को मारने पर मजबूर हैं. मेडिकल चैरिटी एमएसएप का कहना है कि पहली दिसंबर से 28 लोगों की भूखमरी से मौत हो गई है. सीरिया के राजदूत बशर जाफरी ने मदाया में भूखमरी की रिपोर्टों को जाली बताया है और शहर के अंदर रह रहे "आतंकवादियों" पर खाद्य आपूर्ति चुराने का आरोप लगाया है. ब्रिटेन और फ्रांस ने मदाया की घेराबंदी खत्म करने की मांग की है. ब्रिटेन के राजदूत मैथ्यू रायक्रॉफ्ट ने कहा, "नागरिकों को भूखा मरने देना असद सरकार और उसके साथियों की अमानवीय रणनीति है." संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मुश्किल पहुंच वाले इलाकों में रह रहे 45 लाख लोगों को मदद देने में कठिनाई हो रही है.

असद का भविष्य

राष्ट्रपति बशर अल असद को समर्थन दे रहे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि सीरिया को गृहयुद्ध के राजनीतिक समाधान के लिए नए संविधान पर काम करना होगा. जर्मनी के सबसे अधिक बिकने वाले दैनिक बिल्ड के साथ बातचीत में पुतिन ने कहा कि सऊदी अरब और ईरान के बीच विवाद से सीरिया में शांति की कोशिश जटिल हो जाएगी. पुतिन का कहना है कि नए संविधान के आधार पर सीरिया में राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव कराए जाने चाहिए. असद को अपने देश का वैध शासक बताते हुए पुतिन ने कहा, "असद अपनी जनता के खिलाफ नहीं लड़ रहे बल्कि उन लोगों के खिलाफ जो हथियारों के साथ सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं." क्षेत्रीय स्थिरता को असद के समर्थन की वजह बताते हुए पुतिन ने कहा, "हम नहीं चाहते कि सीरिया का अंत इराक या लीबिया जैसा हो."

इंटरव्यू में असद को रूस में शरण दिए जाने पर भी चर्चा हुई. राष्ट्रपति पुतिन ने असद को शरण दिए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया, लेकिन साथ ही कहा कि ये सवाल करने का समय नहीं आया है. पुतिन ने कहा, "उसके लिए अभी समय नहीं आया है. लेकिन निश्चित तौर पर मिस्टर स्नोडेन को रूस में शरण देना उससे ज्यादा मुश्किल था, जितना असद के मामले में होगा." रूस ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी के पूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन को शरण देकर अमेरिका का गुस्सा मोल ले लिया था. अमेरिका ने अपने साथी देशों की मदद से स्नोडेन का रूस से बाहर निकलना असंभव बना दिया.

समर्थन की कोशिश

जेनेवा में सीरिया शांति वार्ता शुरू होने से पहले सीरिया के विदेश मंत्री वालिद मुअल्लम ने नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की. प्रेक्षकों का कहना है कि रूस और चीन के बाद मुअल्लम की भारत यात्रा का मकसद राष्ट्रपति असद के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पास योजना के तहत 25 जनवरी को असद सरकार और सीरियाई विपक्ष के बीच बातचीत शुरू होगी.मार्च 2011 में सीरिया में गृह युद्ध शुरू होने के बाद से 260,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. पश्चिमी देशों और रूस के बीच विवादों के चलते सीरिया में शांति स्थापना की पिछली कोशिशें नाकाम रही हैं.

संयुक्त राष्ट्र समर्थित योजना में फौरन युद्ध विराम करने और ऐसी बातचीत शुरू करने की बात है जिसका लक्ष्य पूरी कार्यपालिका शक्ति के साथ समावेशी अंतरिम शासकीय संस्था की स्थापना हो. इसमें असद के भविष्य पर कोई बात नहीं कही गई है. सीरिया भारत से भी खुले समर्थन की उम्मीद नहीं कर सकता है, लेकिन भारत का कहना है कि सीरिया में बाहरी हस्तेक्षेप से सत्ता परिवर्तन नहीं होना चाहिए.

एमजे/आरआर (एएफपी, रॉयटर्स)

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