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दुनिया

सीबीआई ने हम पर दाग लगा दिया: तलवार दंपत्ति

आरुषि के माता पिता ने सीबीआई पर पलटवार किया है. सीबीआई ने आरुषि के पिता डॉक्टर राजेश तलवार को हत्याकांड का मुख्य संदिग्ध बताया है. तलवार दंपत्ति ने इसे साजिश बताते हुए अदालत जाने की बात कही है.

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एक टेलीविजन चैनल से बात करते हुए आरुषि की मां डॉक्टर नूपुर तलवार ने कहा, ''सीबीआई ने हमें जिंदगी भर के लिए दोषी बना दिया है.'' डॉक्टर तलवार दंपत्ति के मुताबिक आरुषि की हत्या को लेकर उन पर जताया जा रहा संदेह निराधार है. तलवार दंपत्ति के मुताबिक सीबीआई किसी साजिश के तहत उनका नाम ले रही है. इसके खिलाफ वह कोर्ट जाने की तैयारी भी कर रहे हैं.

सीबीआई को संदेह है कि आरुषि की हत्या उसी के पिता डॉक्टर राजेश तलवार ने की है. अदालत में केस की क्लोजर रिपोर्ट पेश करते हुए सीबीआई ने कहा कि डॉक्टर राजेश तलवार मुख्य संदिग्ध हैं लेकिन उनके खिलाफ सबूत नहीं मिल पा रहे हैं. सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत में सोमवार को फैसला होगा.

14 साल की आरुषि की हत्या 15 मई 2008 को हुई. इस हत्याकांड में तीन युवकों को भी गिरफ्तार किया गया था. तीनों युवक डॉक्टर तलवार के दोस्तों के घर पर काम करते थे. आरुषि के घर वाले लगातार नौकरों को हत्यारा बता रहे थे. लेकिन अब सीबीआई की जांच कहती है कि नौकरों का हत्याकांड से कोई लेना देना नहीं हैं.

परिस्थितियों पर आधारित सबूतों का हवाला देते हुए सीबीआई ने हत्या का शक आरुषि के पिता पर ही जताया है. सीबीआई के मुताबिक डॉक्टर तलवार ने आरुषि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से छेड़छाड़ करवाई. इसके अलावा भी कई ऐसी बातें हैं जिनके आधार पर आरुषि के पिता को मुख्य संदिग्ध माना गया है. जांच एजेंसी के मुताबिक हत्याकांड से पहले छत का दरवाजा हमेशा खुला रहता था, लेकिन हत्या के दिन उस पर ताला लगा दिया. इसके अलावा हत्या के बाद जब नौकरानी घर पर सफाई करने आई तो आरुषि की मां ने उससे कहा कि हमारा नौकर हेमराज कही गया हुआ है, यह कहते हुए उन्होंने बालकनी चाबियां नीचे फेंकी. तब उनके हाव भाव एक दम ठीक थे, लेकिन नौकरानी के अंदर आते ही नूपुर तलवार रोने लगी और कहने लगी कि देखो हेमराज मेरी बेटी को मारकर भाग गया है.

इसके बाद यूपी पुलिस मौके पर पहुंची और तलवार दंपत्ति ने अपने नेपाली नौकर हेमराज को हत्यारा बताकर उसके नेपाल भाग जाने का संदेह जताया. लेकिन एक दिन बाद हेमराज का शव तलवार दंपत्ति के घर की छत पर मिला. वहां एक खून से सना एक गद्दा भी था. राजेश तलवार ने हेमराज का शव पहचाने से इनकार कर दिया था. इसके अलावा हत्या के फौरन बाद डॉक्टर तलवार ने अपनी बेटी का अंतिम संस्कार भी कर दिया और अस्थियां हरिद्वार जाकर बहा दी.

पुलिस के सूत्रों ने तब आशंका जताई थी कि आरुषि की अस्थियों के साथ हत्याकांड से जुड़े कुछ सबूत भी मिटा दिए गए. इसके बाद यूपी पुलिस ने आरुषि के पिता को गिरफ्तार कर लिया. बाद में जांच सीबीआई के हवाले की गई. सीबीआई ने नौकरों को पकड़ लिया. अब ढाई साल बाद जांच एजेंसी का कहना है कि हत्या के मुख्य संदिग्ध आरुषि के पिता है.

सीबीआई जांच में यह भी पता चला है कि आरुषि के कमरे को बाहर से सिर्फ चाबी से खोला जा सकता था. यह चाबी नूपुर तलवार के पास थी. पोस्ट मार्टम रिपोर्ट कहती है कि आरुषि और हेमराज के गले को नसों की जानकारी रखने वाले किसी शख्स ने काटा है. आशंका है कि गले पर सर्जिकल ब्लेड का इस्तेमाल किया गया. बाद में नेपाली नौकरों पर खुकरी से हत्या करने आरोप लगे. अब सीबीआई कहती है कि खुकरी से हत्या नहीं की गई. नेपाल और भारत के पहाड़ी इलाकों में खुकरी रखना आम बात है.

सीबीआई के क्लोजर रिपोर्ट तीनों बेगुनाह युवकों के लिए एक बड़ी राहत हैं. राजकुमार, कृष्णा और विजय मंडल नाम के इन नौकरों को कई महीने जेल में रहना पड़ा. गरीबी के चलते वह अपना केस तक ढंग से नहीं लड़ सके. लेकिन अब आखिरकार सीबीआई ने उन्हें बेगुनाह बताया है. यानी हत्यारा नहीं पकड़ा गया उसके चक्कर में गरीब युवक बेवजह पीस गए.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: एन रंजन

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