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दुनिया

सीबीआई छापे के बाद दिल्ली और केंद्र सरकार की तकरार

दिल्ली के मुख्यमंत्री के कार्यालय पर सीबीआई के छापे के बाद केंद्र और दिल्ली सरकार फिर आमने-सामने आ गईं. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने दफ्तर पर छापे का आरोप लगाया तो सीबीआई ने इसका खंडन किया.

सीबीआई ने कहा है छापा मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर और घर पर मारा गया. इस पर केजरीवाल ने कहा कि 'सीबीआई झूठ बोल रही है,"मेरे अपने दफ्तर पर छापा पड़ा है. सीएमओ की फाइलें देखी जा रही हैं. मोदी बताएं कि उन्हें कौन सी फाइल चाहिए." केजरीवाल के करीबी अधिकारी राजेंद्र कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं. छापे के बाद आ रही खबरों के अनुसार उनके घर से ढाई लाख की नकदी और कुछ अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं.

सीबीआई पर केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के विरोधियों के खिलाफ काम करने के आरोप लगते रहे हैं. यह पहला मौका नहीं है जब किसी मुख्यमंत्री को सीबीआई को झेलना पड़ा है. इससे पहले स्वयं नरेंद्र मोदी को सीबीआई की पूछताछ का सामना करना पड़ा है.

हालांकि बीजेपी के वरिष्ठ नेता कह रहे हैं कि वे सीबीआई का इस्तेमाल नहीं करते. सीबीआई तो बस अपना काम कर रही है. भारत के वरिष्ठ संवैधानिक वकील राम जेठमलानी ने कहा है कि छापा सही नहीं है.

जनमत विशेषज्ञ यशवंत देशमुख का कहना है कि यदि सीबीआई के पास संबंधित अधिकारी के खिलाफ पुख्ता केस नहीं है तो बीजेपी आप को विशाल राष्ट्रीय लॉन्च पैड दे देगी.

आप ने मौके का राजनीतिक लाभ उठाने की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी नेता संजय सिंह ने देश भर में कार्यकर्ताओं से सड़कों पर उतरने की अपील की है.

सीबीआई के छापे पर सोशल मीडिया में तंज कसे जा रहे हैं. कोई केंद्र सरकार के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है तो कोई केजरीवाल के साथ

छापे के समर्थन के साथ साथ मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल की भी आलोचना हो रही है.

सीबीआई की विश्वसनीयता कभी भी संदेहों से परे नहीं रही है. उस पर एक बार फिर कोई विश्वास नहीं कर रहा है.

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