1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

सीधी बातचीत को राजी इस्राएल और फलीस्तीन

अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन शुक्रवार को इस्राएल और फलीस्तीन के बीच सीधी बातचीत दोबारा शुरू होने की घोषणा कर सकती हैं. अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने खबर दी है कि दोनों देश दोबारा बातचीत की मेज पर आ सकते हैं.

default

फिर होगी बातचीत

अमेरिकी अखबार ने दो अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि इस्राएल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू और फलीस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास बातचीत करने पर सहमत हो गए हैं. हालांकि अखबार ने अधिकारियों के नाम नहीं बताए हैं. खबर के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इस्राएल और फलीस्तीन के नेताओं के सितंबर में वॉशिंगटन बुला सकते हैं. सितंबर की शुरुआत में ही दोनों देश 'अंतिम दर्जा' देने के मुद्दे पर बातचीत शुरू कर सकते हैं. इसमें येरुशलम की स्थिति और फलीस्तीनी शरणार्थियों की वापसी के मुद्दे भी शामिल हैं.

अगर दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आमने सामने आ जाते हैं, तो मध्य पूर्व में शांति स्थापना की कोशिशों में ओबामा प्रशासन की यह पहली बड़ी कामयाबी होगी. पिछले दो साल से यह बातचीत बंद है और अमेरिका लगातार इसके लिए कोशिशें करता रहा है. दिसंबर 2008 में बातचीत उस वक्त बंद हो गई जब इस्राएल ने गजा पर हमला कर दिया. उसका कहना था कि उसने हमास की ओर से होने वाले रॉकेट हमलों को रोकने के लिए ऐसा किया. तीन हफ्ते तक चली इस बमबारी के बाद कभी दोनों पक्ष बातचीत के लिए राजी नहीं हुए.

गुरुवार को अमेरिका का विदेश मंत्रालय बातचीत को लेकर काफी सकारात्मक नजर आया. मंत्रालय के प्रवक्ता फिलिप क्राउली ने कहा, "हमें लगता है कि दोनों पक्षों को सीधी बातचीत के फैसले तक ले आने के काफी करीब हैं. अब भी कुछ बातों पर चर्चा हो रही है." उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री क्लिंटन ने इस बारे में जॉर्डन के विदेश मंत्री नासिर जुदाह और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से बातचीत की है. ये दोनों नेता उस कूटनीतिक चौकड़ी के प्रतिनिधि हैं जिसमें अमेरिका, रूस, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ शामिल हैं.

क्राउली ने कहा, "हम उस जगह पहुंच गए हैं, जहां पहुंचने की हम उम्मीद कर रहे थे. चौकड़ी के सदस्य प्रक्रिया के प्रति अपना समर्थन जाहिर करेंगे."

फिलीस्तीनी अधिकारियों ने कहा है कि जारी होने वाला कोई भी बयान मार्च में मॉस्को में जारी बयान पर ही आधारित होगा. मॉस्को में इस्राएल को बस्तियां बसाने से रोकने और शांति के लिए आखिरी समझौता करने को कहा गया था.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

DW.COM