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दुनिया

सीआईए यातनाओं के लिए जिम्मेदार

अमेरिकी सीनेट ने खुफिया एजेंसी सीआईए को आतंकवाद के संदिग्धों से 'बर्बरता' से पूछताछ करने और देश को गुमराह करने का दोषी ठहराया है. रिपोर्ट के मुताबिक ओसामा बिन लादेन के मारे जाने में सीआईए की पूछताछ का हाथ नहीं था.

सीआईए के उच्च अधिकारियों ने यह दावा किया था लेकिन सीनेट की रिपोर्ट में सीआईए के रिकॉर्ड का विवरण देते हुए कहा गया है कि सीआईए की कहानी सच्ची नहीं है, देश को गुमराह करने वाली है. सीआईए के पूछताछ के तरीकों को बर्बर बताया गया है. रिपोर्ट के आने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका से दोषी अधिकारियों पर मुकदमा चलाने को कहा है. सीआईए अधिकारी अभी भी कह रहे हैं कि बलपूर्वक पूछने पर ही उन्हें इस मामले की अहम बारीकियां मालूम हुईं. उनका कहना है कि इन जानकारियों से वे अमेरिका और उसके नागरिकों की आतंकवादी हमलों से रक्षा कर सके.

पूछताछ नहीं यातना

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पहले भी पूछताछ के ऐसे तरीकों को यातनाएं कह चुके हैं. 2009 में राष्ट्रपति बनने के बाद ओबामा ने पूछताछ के बर्बर तरीकों पर रोक लगा दी थी. ओबामा ने स्पेनी भाषा के एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा, "जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूं, मेरे मुताबिक यह यातना है. यह हमारी पहचान नहीं है."

6,700 पन्नों की रिपोर्ट में से करीब 500 पन्ने ही गोपनीयता से बाहर रखे गए हैं. ओबामा ने माना कि रिपोर्ट का जारी करना जरूरी था "ताकि हम इसके लिए जवाबदेह हों और लोग समझें कि मैंने इस तरह की पूछताछ पर क्यों रोक लगाई. ताकि हम तय कर सकें कि इस तरह की गलतियां दोबारा न हों." इससे पहले राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 2002 में इस तरह की पूछताछ की इजाजत दी थी लेकिन 2006 तक उन्हें मालूम नहीं था कि इस कार्यक्रम में क्या क्या शामिल है.

टॉर्चर के इन तरीकों में कैदियों को ताबूतनुमा बक्सों में बंद कर देना, हफ्तों तक सोने नहीं देना, बर्फ की सिल्ली पर लिटाना, वॉटरबोर्डिंग, मौत, मारपीट और उनके परिवार के यौनशोषण की धमकी तक शामिल है. सीनेट के जांचकर्ताओं की रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 सितंबर 2001 के हमले के बाद सीआईए ने अमेरिका को सुरक्षित बनाने में कोई योगदान नहीं दिया बल्कि आतंकवाद के आरोपी कैदियों के साथ बर्बरता से पूछताछ की.

अधिकारियों पर मुकदमा चले

एक बयान में सीआईए के निदेशक जॉन ब्रेनन ने कहा कि एजेंसी ने गलतियां कीं और उनसे सीखा भी है. लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन तरीकों से कई ऐसी जानकारियां मिलीं जिनसे वे अमेरिका पर हमलों को टालने और आतंकवादियों को पकड़ने में कामयाब हो सके. ब्रिटेन के एडवोकेसी ग्रुप कोज ने सीनेट की रिपोर्ट आने के बाद आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की है. चीन ने कहा है कि वह यातना का हमेशा से विरोध करता रहा है. उसने अमेरिका को अपना व्यवहार बदलने को कहा है.

संयुक्त राष्ट्र के लिए मानव अधिकार और आतंकवाद विरोधी रिपोर्ट तैयार करने वाले बेन एमरसन ने कहा कि दोषी अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "रिपोर्ट में कही गई इस बात से अधिकारियों को छूट नहीं मिलनी चाहिए कि जिन नीतियों का इस्तेमाल हुआ उनकी इजाजत उच्च स्तरीय अधिकारियों ने दी थी." सीनेट की रिपोर्ट के बाद अफगानिस्तान, पाकिस्तान और थाइलैंड में अमेरिकी दूतावासों को सतर्क कर दिया गया है कि वे अमेरिका विरोधी प्रदर्शनों के लिए तैयार रहें. इन देशों में रह रहे अमेरिकियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी सुरक्षा पर खास ध्यान दें और किसी तरह के प्रदर्शन में हिस्सा ना लें.

एसएफ/एमजे (एपी)

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