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जर्मन चुनाव

'सिर्फ सीएजी रिपोर्ट से लाइसेंस रद्द नहीं हो सकते'

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 2जी स्पैक्ट्रम की प्रक्रिया को सिर्फ सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर निरस्त नहीं किया जा सकता है. शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि, हमें नहीं पता वो क्या कर रही है.

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दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जीएस सांघवी और एके गांगुली की बेंच ने कहा, ''अगर लाइसेंस रद्द होते हैं तो सिर्फ सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर ही यह कार्रवाई नहीं होगी.'' एक याचिका एनजीओ ने दायर की है. एनजीओ का आरोप है कि सरकार ने जुर्माना लगाकर कंपनियों को स्पैक्ट्रम लाइसेंस बांटे. एनजीओ की ओर से मुकदमा वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण लड़ रहे हैं. भूषण ने अदालत के सामने पांच मुख्य बिंदु रखते हुए आवंटन प्रक्रिया रद्द करने की मांग की है.

भूषण की दलील है कि 2जी स्पैक्ट्रम के लाइसेंस बिना नीलामी के बांट दिए गए. लाइसेंस 2001 के कीमतों पर बांटे गए. आवेदन की अंतिम तारीख भी अचानक घटा दी गई. इसकी वजह से दो तिहाई आवेदनकर्ता सीधे बाहर हो गए. इसके अलावा 122 में 85 आवेदनकर्ता अयोग्य थे. 69 आवेदनकर्ता तो दायित्व लेने तक के लिए योग्य नहीं थे.

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इन दलीलों के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए एक मार्च की तारीख मुकर्रर की. लाइसेंस रद्द करने की याचिका जनता पार्टी के मुखिया सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी दायर की है. स्वामी ने ही सबसे पहले 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले का पर्दाफाश किया.

इस मामले में केंद्र सरकार की भी खासी किरकिरी हो रही है. मंगलवार को भी अदालत ने केंद्र पर निशाना साधा. अदालत ने कहा, ''सरकार जो कुछ भी कर रही है वह सब याचिका दायर होने के बाद हो रहा है. यह याचिकाओं का नतीजा ही है. हमें नहीं पता कि वो क्या कर रहे हैं.''

सीएजी के मुताबिक स्पैक्ट्रम घोटाले के चलते सरकार को 176 अरब रुपये का नुकसान हुआ. सीएजी की रिपोर्ट और चारों ओर से घिरने के बाद ए राजा को पिछले साल नवंबर में दूरसंचार मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा. घोटाले की सीबीआई जांच चल रही है.

रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह

संपादन: महेश झा

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