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दुनिया

सियाचिन में दबे सैनिक को जिंदा निकाला

विश्व के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में हिमस्खलन के बाद 6 दिन तक बर्फ में दबे एक भारतीय सैनिक को सेना ने जिंदा बचा लिया है. सेना ने कहा है कि उसकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर है.

सियाचिन में सेना की चौकी पर एक विशाल हिमखंड के गिरने से 10 जवान दब गए थे. हनमंथप्पा कोपड को छह दिन के बाद बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन उसके 9 साथियों की मौत हो गई. सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हूडा ने 5900 मीटर की ऊंचाई पर बचावकर्मियों की मुश्किलों के बारे में बताते हुए कोपड को बचाए जाने को चमत्कार बताया. उन्होंने कहा, "ये हल्के बर्फ वाला हिमस्खलन नहीं था, ये चट्टान जैसे बर्फ की दीवार थी." उन्होंने कहा कि सेना ने बर्फ के नीचे दबे जवानों का पता करने के लिए खोजी कुत्तों और विशेष रडार का इस्तेमाल किया.

जनरल हूडा ने बताया कि देश के दक्षिणी प्रांत कर्नाटक का जवान कोपड बर्फ में 8 मीटर नीचे दबा पाया गया, जहां तापमान माइनस 45 डिग्री सेल्सियस था. रिपोर्टों के अनुसार एक एयर पॉकेट में फंसा होने के कारण उसकी जान बची. बर्फ काटने के लिए सेना ने बैटरी से चलने वाले विशेष आइस कटर सियाचिन भेजे. आइस कटर भेजने के लिए हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया जो इस ऊंचाई पर सिर्फ 50 किलोग्राम वजन का सामान ले जा सकते हैं. जनरल हूडा ने बताया है कि बाकी 9 जवानों की लाशें भी निकाल ली गई हैं और बचाव कार्य पूरा हो गया है.

कोपड के पिता ने बेटे के जिंदा बच जाने पर खुशी का इजहार किया है. "भगवान हम पर मेहरबान है. उसकी मां रो रही थी. मैं रो रहा था." टेलिविजन रिपोर्टों में पिता ने कहा है कि उनके पास बेटे को देखने के लिए जाने का पैसा नहीं है. यदि उन्हें सरकारी मदद मिलती है तो वे अपने बेटे को देखने जाएंगे.

इस बीच हनमंथप्पा कोपड को इलाज के लिए दिल्ली लाया गया है और सेना के अस्पताल में भर्ती किया गया है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कोपड के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है तो प्रधानमंत्री घायल जवान को देखने सेना के अस्पताल गए.

भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित सियाचिन ग्लेशियर पर 1984 के बाद से 8000 से ज्यादा सैनिकों की जान गई है. उनमें से ज्यादार लड़ाई में नहीं बल्कि हिमस्खलन, ठंड, ऊंचाई पर होने वाली बीमारी या दिल के दौरे से मरे हैं. 2012 में गयारी चौकी पर हुई गंभीर दुर्घटना में पाकिस्तान के 140 सैनिक मारे गए थे. अनुमान के अनुसार भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही ग्लेशियर पर करीब 3000 सैनिकों को तैनात कर रखा है, जहां सर्दियों में तापमान शून्य से 70 डिग्री नीचे तक पहुंच जाता है और प्रति घंटे 160 किलोमीटर की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलती हैं.

परमाणु सत्ता संपन्न भारत और पाकिस्तान ने 1987 में सियाचिन पर लड़ाई लड़ी थी लेकिन 2004 में एक समझौते के बाद से बंदूकें शांत हैं. सियाचिन कश्मीर का हिस्सा है जिस पर भारत और पाकिस्तान दोनों ही दावा कर रहे हैं. इसकी वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच 1947 में विभाजन के बाद से तीन लड़ाईयां हो चुकी हैं.

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