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जर्मन चुनाव

सिब्बल ने आनंद से माफी मांगी

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने विश्व शतरंज चैंपियन विश्वनाथन आनंद से माफी मांगी और कहा, मंत्रालय ने उनकी नागरिकता पर सवाल नहीं उठाया. सिब्बल ने कहा, आनंद हैदराबाद यूनिवर्सिटी की मानद डॉक्टरेट लेने को तैयार.

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मान गए आनंद

इससे पहले भारत में हैदराबाद की यूनिवर्सिटी ने कहा कि वह आनंद और हावर्ड यूनिवर्सिटी की जाने माने गणितज्ञ डेविड ममफोर्ड को मानद उपाधि देना चाहती है लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उसके प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी. मंत्रालय को उनकी नागरिकता पर संदेह रहा है. आनंद का संबंध तमिलनाडु से है लेकिन कुछ साल से वह स्पेन में रह रहे हैं. लेकिन अब भी उनके पास भारतीय पासपोर्ट ही है.

Der indische Wissenschaftsminister Kapil Sibal

सिब्बल ने मांगी माफी

मामले को तूल पकड़ता देख सिब्बल ने तुरत फुरत प्रेस कांफ्रेस बुलाई और कहा, "मैंने आनंद से कहा है कि उन्हें आज ही मानद उपाधि दी जा सकती है. उन्होंने संकेत दिया कि आज शाम उन्हें कुछ दूसरे काम हैं. फिर मैंने कहा कि अपनी सुविधा के अनुसार कोई तारीख तय कर लें. उन्होंने यह बात मान ली है." सिब्बल ने आनंद को फोन किया और पूरे मामले पर अफसोस जताया.

हैदराबाद यूनिवर्सिटी के गणित विभाग के प्रमुख रजत टंडन कहते हैं, "हम विश्वनाथन आनंद को मानद डॉक्टरेट उपाधि देने को तैयार हैं. ऐसा करने से रोका या मना नहीं किया गया है. लेकिन इसमें देर हो रही है. मंत्रालय ने आनंद की नागरिकता पर सवाल उठाया है." टंडन ने कहा कि इस बारे में उनके प्रस्ताव का मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया है. वह कहते हैं, "इस साल जुलाई में हमें पता चला कि मंत्रालय को आनंद की नागरिकता पर संदेह है. हमने इस बारे में बहुत से स्पष्टीकरण भेजे, लेकिन मंत्रालय की तरफ से मंजूरी नहीं मिली."

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में गणित पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है. इसी मौके पर यूनिवर्सिटी आनंद को सम्मानित करना चाहती थी. टंडन का कहना है कि वे मंगलवार को ही आनंद को उपाधि देना चाहते थे लेकिन विवाद की वजह से आनंद ने इनकार कर दिया.

इससे पहले यूनिवर्सिटी के एक उच्चाधिकारी ने कहा है कि मंत्रालय के रुख से उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें. अधिकारी के मुताबिक, "इस मुद्दे पर मंत्रालय और यूनिवर्सिटी के बीच खूब चिट्ठी पतरी भेजी गई हैं. असल में आनंद की पत्नी ने उनके भारतीय पासपोर्ट की कॉफी भी फैक्स की है. लेकिन फिर भी मंत्रालय की तरफ से कोई जवाब नहीं आया."

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः ए जमाल

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