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मनोरंजन

सितारा देवी के साथ बनारस घराने के एक युग का अंत

94 वर्षीय कथक नृत्यांगना का लंबी बीमारी के बाद मुंबई के जसलोक अस्पताल में निधन हो गया. उनके दामाद राजेश मिश्रा ने उनके निधन की पुष्टि की. सितारा देवी का अंतिम संस्कार गुरूवार की सुबह किया जाएगा.

प्रख्यात कथक नृत्यांगना सितारा देवी के साथ बनारस घराने के एक और सितारे का अंत हो गया. 1920 में कोलकाता में पैदा हुई सितारा देवी हमेशा कहती थीं, "मैं कृष्ण लीला दिखाने वाली बस एक कथाकार हूं."

कथाकार परिवार सुखदेव महाराज जी के ब्राह्मण परिवार में पैदा हुई सितारा देवी का नाम धनलक्ष्मी था. आठ साल की उम्र में हुई उनकी शादी तब टूट गई जब उन्होंने स्कूल जाने और डांस सीखने की इच्छा जताई. सुखदेव महाराज खुद कथक के पितृ पुरुष कहे जाते हैं. सावित्री सत्यवान में उनके अभिनय और नृत्य के कारण उनके पिता भी प्रभावित हुए और उन्हें कथक सिखाना शुरू किया.

11 साल की उम्र में सितारा देवी अपने परिवार के साथ मुंबई आ गई और यहां उन्होंने रवींद्र नाथ टैगोर को प्रभावित किया. टैगोर ने उन्हें पचास रुपये और एक शाल भेंट की लेकिन सितारा देवी ने मना कर दिया और कहा कि उन्हें सिर्फ बड़ी नर्तकी बनने का आशिर्वाद चाहिए. अगले छह दशक वे कथक को आगे लाईं और बॉलीवुड में कथक को लाने में अहम ताकत बनीं.

सितारा देवी एक ऐसे दौर में कथक नृत्यांगना बनी जब लड़कियों का नृत्य सीखना बुरा माना जाता था. उन्होंने इस नृत्य को एक नए मकाम तक पहुंचाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से किए गए ट्वीट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने सितारा देवी के निधन पर दुख व्यक्त किया है और कथक के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को याद किया है.

एएम/आईबी (वार्ता)

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