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दुनिया

साथ आएं राजनीतिक दलः राष्ट्रपति

मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि वह सभी राजनीतिक ताकतों को साथ लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि संविधान पर सहमति बन सके. और जोर देकर कहा कि मोहम्मद मुर्सी की ताकत को बढ़ाने वाले आदेश 'अस्थाई प्रकृति' के हैं.

राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान में कहा है, "यह आदेश जरूरी है ताकि पुरानी सरकार और बदलाव के इस दौर में के भ्रष्टाचार और अन्य अपराधों के जिम्मेदार लोगों को कठघरे के पीछे लाया जा सके."
राष्ट्रपति की ताकतें बढ़ाने वाले और उन्हें न्याय व्यवस्था से ऊपर करने वाले आदेश के बाद मुर्सी का देशव्यापी विरोध हो रहा है. जजों और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने भी कड़े शब्दों में मुर्सी की निंदा की है.

गुरुवार को मुर्सी ने राष्ट्रपति की ताकतें बढ़ा लीं, जिसके मुताबिक राष्ट्रपति के फैसलों पर अदालत का कोई जोर नहीं चलेगा. इसके बाद विपक्षियों और उदारवादियों ने एक बार फिर तहरीर चौक पर विरोध प्रदर्शनों का बिगुल बजाया.

अदालत और जज इसे न्याय व्यवस्था की अनदेखी बता रहे हैं और उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस कानून को रद्द नहीं किया गया तो वह हड़ताल कर देंगे साथ ही विपक्ष ने और विरोध प्रदर्शन बुलाए हैं. मंगलवार को बड़ा प्रदर्शन होना है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के पूर्व प्रमुख और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता अल बारादाई ने कहा, "ऐसे तानाशाह के साथ बात करने की कोई जगह ही नहीं है. वह अति दमनकारी, घृणास्पद कानून लागू करते हैं और फिर कहते हैं कि आओ मतभेद मिटा लें."

अल बारादेई ने विपक्ष के नेताओं से मुलाकात की है. उन्होंने कहा कि मुर्सी की डिक्री ने मिस्र के मुश्किल बदलाव को और मुश्किल बना दिया है. हिंसा के चक्र को रोकने के लिए कदम उठाना जरूरी है. "आप यह कैसे कर सकते हैं. मुझे तो इसके अलावा कोई रास्ता नहीं दिखाई देता कि मिस्टर मुर्सी अपना तानाशाही फैसला वापस लें."

Demonstration Kairo Ägypten November 2012

हिंसक विरोध प्रदर्शन

पूर्व यूएन राजनयिक का कहना था कि इस फैसले ने मिस्र में नया फाराओ खड़ा कर दिया है. अल बारादेई ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे वामपंथी हामदीन सबाही, अरब लीग के पूर्व प्रमुख अम्र मूसा, राष्ट्रपति पद के तीसरे उम्मीदवार अब्देल मोनेइम अबोल फोतूह से भी मुलाकात की. "हमें अपना विरोध प्रदर्शन और शांति पूर्ण असहयोग का तरीका तीव्र करना होगा."

चेतावनी नहीं

बारादेई का कहना है कि मुर्सी फैसले ने उदारवादियों और बाकी विपक्षी पार्टी को साथ ला दिया है. अभी तक वह सभी अलग अलग ताकतें बनी हुई थी.

बारादेई ने कहा कि वह हाल ही में मिस्र की राजनीतिक प्रणाली के बारे में बातचीत के लिए मुर्सी से मिले थे लेकिन बातचीत के दौरान उन्होंने हवा भी नहीं लगने की दी कि कोई अहम डिक्री आने वाली है. अल बारादेई को पश्चिमी देशों से सहयोग की आशा है, "मैं उम्मीद करता हूं कि जल्दी ही अमेरिका, यूरोप और वो सभी देश जो मानवीय गरिमा का ध्यान रखते हैं, उनसे कड़ी भर्त्सना का बयान आएगा. "

हुस्नी मुबारक के जाने के बाद मिस्र के राष्ट्रपति पद के लिए अल बारादेई नहीं खड़े हुए. "लोग अभी भी रक्षक में विश्वास रखते हैं. पता है, कोई व्यक्ति जो अकेला उन्हें बचा ले." वह कहते हैं कि लेकिन मिस्र को अब अपनी मुश्किलें हल करने के लिए एक व्यक्ति पर भरोसा नहीं करना चाहिए.

अल बारादेई का कहना है कि उन्होंने चुनाव के पहले संविधान के लिए काफी बहस की थी ताकि देश को चुनावों के बाद मुश्किल का सामना नहीं करना पड़े, जो अब करना पड़ रहा है. लेकिन नया संविधान बनाना भारी पड़ रहा है क्योंकि उदारवादी पारंपरिक इस्लामिस्ट पार्टियों के साथ नहीं आ पा रहे और न ही रुढ़िवादी कोई बदलाव करने के लिए तैयार दिख रहे हैं.

उधर अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकी पर्यटकों को ऐसी किसी भी जगह पर जाने से मना किया है जहां विरोध प्रदर्शन हो रहे हों. दंगा रोधी पुलिस तहरीर चौराहे के पास कॉन्क्रीट के बैरियर लगा रही है ताकि विरोध प्रदर्शनकारी आस पास की सरकारी इमारतों तक नहीं पहुंचे.

एएम/ओएसजे (रॉयटर्स, एएफपी)

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