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मनोरंजन

साढ़े आठ अरब की इसाबेला मिली

इटली ने स्विट्जरलैंड से लियोनार्दो दा विंची की एक मशहूर पेटिंग वापस मांगी है. गायब करने वाले इस पेटिंग को 12 करोड़ यूरो यानि करीब साढ़े आठ अरब रुपये में बेचना चाह रहे थे.

16वीं शताब्दी की महान शख्सियत लियोनार्दो दा विंची ने पुर्नजागरण काल में संभ्रांत वर्ग की एक महिला इसाबेला का पोट्रेट बनाया. इसे इसाबेला द'स्टे कहा जाता है. इस पेंटिंग की तलाश जांचकर्ताओं को काफी समय से थी. हाल ही में पता चला कि यह एक स्विस बैंक के लॉकर में है. 61 गुणा 46.5 सेंटीमीटर की यह तस्वीर लुगानो के ट्रस्ट के लॉकर में है.

पेंटिंग के स्विट्जरलैंड में होने की जानकारी अगस्त 2013 में आई. इटली ने पहले मध्यस्थों के जरिए पेंटिंग को पाने की कोशिश की. वकीलों ने स्विस अधिकारियों से कहा कि पोट्रेट रखने वालों के पास सही एक्सपोर्ट लाइसेंस नहीं है. लेकिन मध्यस्थता की कोशिशों के दौरान ही पेंटिंग अचानक गायब हो गई.

इसके बाद अक्टूबर 2014 में एक ब्रिटिश अखबार ने इस पेंटिंग की लोकेशन के बारे में जानकारी दी. इटली की कला और टैक्स पुलिस के मुताबिक उस रिपोर्ट के बाद ठोस जांच की गई. अब कई वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर यह साबित हो चुका है कि यह लियोनार्दो दा विंची की बनाई हुई पेंटिंग है.

इतालवी प्रशासन ने स्विस बैंक के लॉकर से इस पेंटिंग को जब्त करने का आदेश दिया है. अभियोजन पक्ष का कहना है कि पेंटिंग गैरकानूनी ढंग से इटली से बाहर ले जाई गई. इटली मध्यस्थों का भी सहारा ले रहा है. पेंटिंग के असली मालिक का पता लगाने की कोशिश की जा रही है.

ओएसजे/आईबी (एपी)

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