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ताना बाना

साझा प्रयास से बदलती गांवों की तस्वीर

भारत के सबसे पिछड़े राज्यों में शुमार उड़ीसा की 80 फीसदी ग्रामीण आबादी को आज भी पीने का साफ पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. लेकिन कुछ गांवों के लोगों ने अपने हालात को बदल डाला है.

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उड़ीसा में कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां हर घर में शौचालय और पीने का साफ पानी है. कटक जिले का कोचिला नोगांव हाल ही में ऐसे गांवों की सूची में शामिल हुआ है.

Eine Frau in Kochila

इस गांव के तीन सौ में से ढाई सौ परिवार गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं. उनकी मासिक आय सात डॉलर यानी तीन सौ रुपए से भी कम है. लेकिन इन सबके पास वह चीज है जो देश के ज्यादातर गांवों के लोगों के लिए अब भी एक सपना है. इन सबके पास पीने का साफ पानी और अपना स्नानघर और शौचालय है. इतनी कम आय वाले लोगों के पास आखिर यह सुविधाएं आईं कैसे? उड़ीसा सरकार की एक योजना और उसमें गांववालों खासकर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस असंभव नजर आने वाले काम को संभव कर दिखाया है.

शौचालय नहीं होने की वजह से गांव के लोगों को नित्यक्रिया से निवृत्त होने के लिए के लिए खेतों में जाना पड़ता था. उनको अब तक खुले में नहाना पड़ता था. खासकर युवतियों और महिलाओं के लिए यह काफी असुविधाजनक था. इसके अलावा पीने का साफ पानी नहीं होने की वजह से ज्यादातर लोग पेट की बीमारियों से पीड़ित थे. इस गांव की मंजू नायक कहती हैं, "पहले शौचालय जाने में काफी दिक्कत होती थी. पूरे इलाके में गंदगी पसरी रहती थी. रास्ता चलना भी मुहाल था. हमें खुले में ही नहाना पड़ता था. पहले हम कुंए का गंदा पानी पीते थे. उसमें कीड़े होते थे. इसके चलते गांव के ज्यादातर लोग पेट की बीमारियों से पीड़ित थे. अब सब ठीक है. हमें पीने का पानी तो मिल ही रहा है, स्नानघर और शौचालय की सुविधा भी मिल गई है."

उड़ीसा सरकार ने केंद्र के सहयोग से हर गांव के हर घर के लिए शौचालय और पीने का साफ पानी मुहैया कराने की जो योजना शुरू की है, यह बदलाव उसी का नतीजा है. उस योजना के तहत केंद्र, राज्य सरकार और स्थानीय विधायक ने तो पैसे दिए ही, ग्रामीणों ने भी एक-एक हजार रुपए का योगदान दिया.

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