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दुनिया

साइप्रस में 50 साल से शांति सैनिक

शांति शब्द के साथ सैनिक शब्द वैसे तो मेल नहीं खाता. लेकिन संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिक 50 साल से यूरोप के छोटे से द्वीपीय राष्ट्र साइप्रस में डटे हुए हैं. यह इलाका तुर्की और ग्रीस के बीच विवाद वाली जगह है.

साइप्रस अपनी सफेद रेत और समुद्र की वजह से छुट्टियों का केंद्र है लेकिन बीच बीच में यहां तनाव भी हो जाता है. ताजा तनाव 20 साल पहले हुआ, जिसके बाद यहां गृह युद्ध जैसे हालात बन गए.

जब 1964 में साइप्रस के लिए संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों का दल तैयार किया गया था, तो इलाके में खूनखराबे की संभावना थी. इससे सिर्फ चार साल पहले ही साइप्रस ने ग्रेट ब्रिटेन से आजादी हासिल की थी. इसके बाद तुर्क और ग्रीक मूल के लोगों के बीच विवाद छिड़ गया. शांति सैनिकों का काम दोनों पक्ष के लोगों को अलग अलग करके रखना था.

थोड़ा हुआ प्रभाव

शांति सैनिकों के प्रयास का प्रभाव 10 साल तक तो जरूर दिखा. लेकिन 1974 में तुर्की ने इस पर हमला कर दिया और इसके बाद ग्रीक पक्ष की ओर से सत्ता पलट की कोशिश की गई ताकि इस इलाके को ग्रीस में मिलाया जा सके. हमले के कुछ ही घंटों बाद तुर्की की सेना राजधानी निकोसिया के अहम एयरपोर्ट तक पहुंच गई और उस पर कब्जे की कोशिश करने लगी. हालांकि तब शांति सैनिकों ने इसका विरोध किया और स्थिति को संभाला.

Zypern Kyrenia Hafen

खूबसूरत साइप्रस

इस इलाके में शांति वार्ता के कई बार प्रयास किए गए लेकिन ठोस नतीजा नहीं निकला है और शांति सैनिक अभी भी बने हुए हैं. ताजा प्रयास पिछले महीने शुरू किया गया. कनाडा के पूर्व शांति सैनिक लैरी गॉलनर वहां काम कर चुके हैं. उनका कहना है, "यह बिना किसी देश की सीमा वाला इलाका है. देखिए कि इतनी बड़ी जमीन का कोई इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है."

दो हिस्सों में

तुर्की के हमले के बाद साइप्रस की अंतरराष्ट्रीय पहचान दो हिस्सों में बंट गई. ग्रीक हिस्सा और तुर्क हिस्सा. शांति सैनिकों का काम ज्यादा नहीं है. उन्हें सिर्फ इस लकीर पर गश्त लगानी होती है और इस बात को तय करना होता है कि यथास्थिति बनी रहे.

तुर्की के हमले के बाद यहां कि स्थिति बेहद खराब हो गई. खास तौर पर जब तुर्क हिस्से ने 1983 में आजादी की घोषणा कर दी. उस इलाके की आजादी को सिर्फ तुर्की की मान्यता है.

छुट्टी जैसा काम

हालांकि कनाडा, फिनलैंड और स्वीडन के शांति सैनिकों के लिए यहां काम करना अच्छा होता है क्योंकि वे सर्द इलाके से आते हैं और साइप्रस में मौसम हमेशा अच्छा रहता है. ऐसे में छह महीने की तैनाती उनके लिए छुट्टी की तरह होती है. 32 देशों के हजारों शांति सैनिक यहां काम कर चुके हैं. हालांकि संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षक इससे लंबे समय तक भारत और पाकिस्तान जैसे मुल्कों में रह चुके हैं लेकिन इतने लंबे समय तक कहीं सशस्त्र सेना नहीं रही है.

साइप्रस में शांति सैनिक भेजने वालों में कनाडा सबसे बड़ा देश है. 1964 से 1993 के बीच उसके 25,000 सैनिक यहां तैनात हो चुके हैं. अभी भी इसका प्रतिनिधित्व है और एक अधिकारी कनाडा का है. कनाडा के मेजर जनरल एलेन फोरांड का कहना है, "हमें इस बात का फख्र है कि हम वहां रहे और हमारे वहां रहने से वहां की स्थिति में बदलाव आया है."

एजेए/ओएसजे (एपी)

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