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विज्ञान

सांस के टेस्ट से टीबी का पता

वह दिन दूर नहीं जब टीबी के संभावित मरीज की सांस से पता चल जाया करेगा कि क्या उसे टीबी है. टीबी का पता लगाने वाले अब तक मौजूद पारंपरिक तरीके हफ्तों का समय ले लेते हैं.

टीबी के श्वास टेस्ट पर बीते काफी समय से रिसर्च जारी है. नई जांच में सांस के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि क्या मरीज द्वारा छोड़ी गई हवा में नाइट्रोजन के होने के प्रमाण मिलते हैं. यह गैस टीबी पैदा करने वाले जीवाणु माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्यूलॉसिस उत्सर्जित करते हैं.

इन जीवाणुओं में कैट जी नाम का एक उत्प्रेरक पाया जाता है. जब जीवाणुओं को आईसोनियाजिड दवाई से गुजारा जाता है तो यह एंजाइम एंटीबायोटिक के साथ मिलकर नाइट्रोजन गैस छोड़ता है. इस टेस्ट में आईसोनियाडिज की थोड़ी मात्रा लेकर पांच दस मिनट इंतजार किया जाता है. फिर श्वास का नमूना लिया जाता है. इसे रासायनिक स्तर पर मास स्पेक्ट्रोमीटर से परखा जाता है.

टेस्ट पॉजिटिव आने का मतलब है कि नमूने में नाइट्रोजन गैस मौजूद है. यानि व्यक्ति टीबी से संक्रमित है. इसका यह भी मतलब है कि इस व्यक्ति को आईसोनियाडिज के इलाज से ठीक किया जा सकता है. अभी तक इस तकनीक का इस्तेमाल खरगोशों पर किया जा चुका है. मनुष्य पर इसका इस्तेमाल सुरक्षित है या नहीं, यह देखने के लिए अभी कई और टेस्ट बाकी हैं.

अगर टेस्ट का परिणाम निगेटिव आता है तो इसके दो अर्थ हो सकते हैं. पहला यह कि उस व्यक्ति को टीबी नहीं है. दूसरी संभावना यह भी है कि व्यक्ति को टीबी है लेकिन मर्ज इस इलाज के लिए प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर चुका है. ऐसे व्यक्ति में मौजूद टीबी के जीवाणुओं पर आईसोनियाडिज बेअसर है.

इन दिनों टीबी के ऐसे मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं जिनमें जीवाणुओं ने कई दवाओं के लिए प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर ली होती है. ऐसी स्थिति में इलाज महंगा होता है. इलाज ज्यादा दिन तक चलता है और उसके काफी विपरीत प्रभाव भी हो सकते हैं.

साइंस की नेचर कम्यूनिकेशंस पत्रिका में छपी इस रिसर्च को यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मेक्सिको के रिसर्चर ग्रैहम टिमिंस की अध्यक्षता में अंजाम दिया गया.

पिछले साल टीबी के कारण दुनिया भर में 13 लाख लोगों ने जान गंवाई. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीबी को एड्स के बाद सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या माना है. टीबी का पारंपरिक लैब टेस्ट लगभग छह हफ्ते का समय लेता है. तेज और असरदार तरीकों के लिए रिसर्ज जारी है.

एसएफ/एएम (एएफपी)

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