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दुनिया

सांसदों का वेतन शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम

भारतीय सांसदों के मासिक वेतन और भत्ते में भारी वृद्धि के बावजूद वह विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है. विपक्षी सांसद उसे और बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं.

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वेतन बढ़ाने की मांग

भारत में सांसदों का वेतन तीन गुना बढ़ जाने के बावजूद वे खुश नहीं हैं. इसकी एक वजह है संसदीय समिति के प्रस्ताव को मानकर वेतन के मामले में उन्हें सर्वोच्च सरकारी अधिकारियों का दर्जा न दिया जाना तो दूसरी ओर विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्था के सांसदों के साथ विषमता होना.

भारत सरकार ने शुक्रवार को जानकारी दी है कि दुनिया की शीर्ष 20 अर्थव्यवस्थाओं में भारत चौथे स्थान पर है. वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा ने लोकसभा में कहा कि व‌र्ल्ड इकोनोमिक आउटलुक 2010 के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों के अनुसार क्रय शक्ति के आधार पर जीडीपी के संदर्भ में दुनिया की शीर्ष 20 अर्थव्यवस्थाओं में भारत चौथे स्थान पर है जबकि चीन दूसरे स्थान पर है.

कैबिनेट ने भारतीय सांसदों की बेसिक सैलरी 16000 रुपए से बढ़ाकर 50000 रुपए (1075 डॉलर) कर दी है. इसकी तुलना में अमेरिकी सांसदों को प्रति माह 14,500 डॉलर मिलते हैं जो भारतीय सांसदों के मुकाबले 13 गुना है.

इसी तरह कनाडा के सांसदों को 12,611 अमेरिकी डॉलर मिलते हैं तो ब्रिटिश सांसदों को 8500 अमेरिकी डॉलर. ऑस्ट्रेलिया के सांसदों की सैलरी 9833 अमेरिकी डॉलर प्रति महीना है तो जापान के सांसदों को हर महीने 15,200 डॉलर वेतन मिलता है. जर्मनी के सांसदों को 7,688 यूरो (9764 डॉलर), फ्रांस में 7002 यूरो (8892 डॉलर), इटली में 5487 यूरो (6978 डॉलर) और स्पेन में 3,126 यूरो (3970 डॉलर) मिलता है.

एक और रोचक तुलना. 2008 में ऑस्ट्रेलिया की प्रति व्यक्ति नेट इनकम 31,432 अमेरिकी डॉलर थी. जर्मनी की 32,279, जापान की 27,084, ब्रिटेन की 34,053 और अमेरिका की 41,491 डॉलर. इसके विपरीत भारत में 2008-2009 में औसत आय सिर्फ 861 डॉलर प्रति व्यक्ति थी.

रिपोर्ट: पीटीआई/महेश झा

संपादन: वी कुमार

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