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मनोरंजन

सांता को मना सिगरेट, टेलीफोन

दिसंबर सांता क्लॉज का मौसम होता है. उनकी मांग तेजी से बढ़ रही है. जर्मनी में सांता क्लॉज को भी ट्रेनिंग दी जा रही है. यहां कोई भी सीख सकता है कि सांता क्लॉज बनने के लिए सबसे जरूरी बातें क्या क्या हैं.

कोलोन के एक रेस्तरां में श्टेफान डोएसरेक ने पूरी तैयारी कर ली है. बीच बीच में खाने के लिए क्रिसमस के खास बिस्किट हैं. और सांता क्लॉज बनने का ट्रेनिंग लेने वालों के लिए निकोलस वाले टिश्यू पेपर रखे हुए हैं. हर साल नवंबर में डोएसरेक को बहुत काम रहता है. क्योंकि इसी समय से नए सांता क्लॉज की ट्रेनिंग शुरू हो जाती है.

सेमीनार में हिस्सा लेने के लिए 15 लोगों ने नाम दर्ज कराया है. आराम से होने वाली ट्रेनिंग में नए लोगों को सिखाया जाता है कि एक सांता क्लॉज को क्या आना सबसे जरूरी है. सबसे जरूरी है खुद को व्यवस्थित रखना और किसी भी नई स्थिति के लिए एकदम तैयार रहना. साथ ही बच्चों के साथ सांता को एकदम दोस्ताना होने की जरूरत है.

लाल गाऊन और सफेद दाढ़ी

एक डंडी पर अलग अलग लाल गाउन टंगे हैं. डोएसरेक सारे दिखाते हैं और समझाते हैं कि क्या चल सकता है और क्या नहीं. ट्रेनिंग मास्टर नहीं चाहते कि सांता लाल बाथगाउन और रुई की दाढ़ी पहने. एक सच्चे सांता के लिए जरूरी है कि वह खास जैली बैग कैप, दाढ़ी और विग पहने साथ ही सफेद दस्ताने भी, जिसकी अपनी कीमत है. एक अच्छी सांता की ड्रेस पांच सौ यूरो यानी तीस हजार रुपये से कम की नहीं आती. सबसे ज्यादा जरुरी है कि सांता कोई गहना नहीं पहनेगा और शरीर पर पियरसिंग या नाक कान छिदे नहीं होने चाहिए. जिस समय सांता की भूमिका में कोई व्यक्ति हो, न तो वह फोन अटैंड करे और न ही सिगरेट पिए."रोजमर्रा का कोई भी काम. जो कोई व्यक्ति हर दिन करता हो, इस पोशाक में आने के बाद उसे वह सब करने की अनुमति नहीं है. जैसे ही वह अपने बैग से मोबाइल निकालता है. वह किसी सूरत में सांता नहीं है."

लेडी सांता को कोई मुश्किल नहीं

सेमीनार में कई तरह के लोग हैं. छात्र भी हैं, अनुभवी सांता भी और महिलाएं भी. इस बार महिलाओं की प्रतिनिधि आनेग्रेट हैं. वह हालांकि सेले के विली के साथ आई थीं. लेकिन सेमीनार में महिलाओं को खुशी खुशी शामिल किया जाता है. हालांकि लेडी सांता पर कोई विश्वास नहीं करता. खासकर बच्चे. "बच्चे लेडी सांता पर विश्वास नहीं करते. इसलिए हम महिलाओं को एंजल बनाते हैं जो सांता क्लॉज के साथ होती हैं. क्योंकि ये एंजल भी बहुत अहम हैं."

डोएसरेक सेमिनार में आए लोगों को समझाते हैं कि सांता क्लॉज बनना सिर्फ पैसे कमाने के लिए नहीं है. यह एक जुनून है. ताकि बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ सके और वह "सांता क्लॉज के अस्तित्व पर विश्वास कर सकें."

डोएसेरेक सामान्य रूप से सांता क्लॉज के तौर पर पैसे नहीं कमाते. बल्कि वह मीडिया सलाहकार हैं और सांता के तौर पर नौकरी उनका अतिरिक्त काम है जो वह जुनून के साथ करते हैं. 18 साल से वह यह काम कर रहे हैं और 13 साल से ट्रेनिंग देते हैं. उनके सेमीनार की फीस 25 यूरो है. डोएसेरेक ने यह फीस सिर्फ इसलिए रखी है कि हर कोई नहीं आ जाए. सिर्फ वही लोग सेमीनार में हिस्सा लें जिन्हें ये काम करना अच्छा लगता है. डोएसेरेक कहते हैं, "एक बार आप सांता का गाउन पहनिए, टोपी, दाढ़ी, विग सब लगाइए फिर आराम से टीवी के सामने बैठ जाइए. तब आपको पता लगेगा कि दाढ़ी कहां चुभ रही है क्या अजीब लग रहा है या किससे तकलीफ हो रही है."

सेमिनार के आखिर में सभी भागीदार सांता की ड्रेस पहन कर देखते हैं और महसूस करते हैं कि कहीं कुछ चुभ तो नहीं रहा. सेमिनार खत्म होने के साथ ही सब एक्सपर्ट सांता बन जाते हैं.

रिपोर्टः तान्या हिल्डन/आभा मोंढे

संपादनः एन रंजन

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