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दुनिया

सहानुभूति और राहत के बीच संजू

संजय दत्त की सजा में ढिलाई की आस तो उसी दिन से लगने लगी थी, जब उन्हें सजा सुनाई गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार उन्हें चार हफ्तों की मोहलत दे ही दी. लेकिन कानून की नजर में सबके बराबर होने वाली बात पर सवाल उठ रहे हैं.

भारत में अदालतों की इज्जत बहुत ज्यादा है और उनके फैसलों पर कोई सवाल नहीं उठाता. हालांकि वरिष्ठ वकील और जनता दल के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी का कहना है कि यह शायद आखिरी बार है, "दत्त ने जो पहले कहा था, ठीक उसका उल्टा किया. उन्होंने कहा था कि वो समय पर समर्पण कर देंगे. मुझे लगता है कि यह आखिरी बार है नहीं तो लोगों के मन में सुप्रीम कोर्ट के लिए जो आदर है वह घट जाएगा."

फिल्मकारों से लेकर नेताओं और मीडिया से लेकर जस्टिस काटजू तक संजय दत्त के लिए नरमी बटोरने का काम कर रहे हैं. देश की सबसे बड़ी अदालत ने जिसे मुजरिम करार दिया है, उसे "बेचारा" और "मासूम" के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया. यहां तक कहा गया कि उनकी वजह से फिल्मकारों के 278 करोड़ रुपये दांव पर लगे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर चुटकी तो जरूर ली कि क्या "निर्माताओं को नहीं मालूम था कि संजय दत्त को सजा हुई है." मांग तो छह महीने की थी लेकिन चार हफ्ते की मोहलत मिल ही गई.

पूर्व अभिनेता और केंद्रीय मंत्री सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त पर 1993 के मुंबई बम हमलों में शामिल होने का आरोप सिद्ध हो चुका है. उन्हें हथियार रखने की वजह से पांच साल की सजा मिली है, जिसमें से डेढ़ साल वह जेल में गुजार चुके हैं. सुनील दत्त कांग्रेस के नेता थे लेकिन वे तस्वीरें सबको याद होंगी, जब वह संजय दत्त की वजह से शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे के घर मातोश्री गुहार लगाने गए थे. आरोप लगते रहे हैं कि नामी खानदान से जुड़े होने का फायदा दत्त को मिला क्योंकि इसी तरह के आरोप में दूसरे मुजरिमों को इससे कहीं ज्यादा 10 साल तक की सजा मिली है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट की वकील कामिनी जायसवाल का डीडब्ल्यू से कहना है कि इसमें नामी खानदान वाली कोई बात नहीं, "हर मामला अलग होता है लेकिन अगर कोई आम आदमी भी इस तरह की अपील लेकर आए तो मैं यह दावा तो नहीं करती कि कोर्ट इसी तरह का फैसला देगी लेकिन मुझे यकीन है कि उन्हें भी मानवीय आधार पर वक्त मिल जाता."

इस मामले में जैबुन्निसा काजी अनवर और शरीफ अब्दुल गफूर पारकर जैसे लोग भी दोषी करार दिए जा चुके हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दोबारा विचार वाली याचिका पर सुनवाई करने से भी इनकार कर दिया. उनकी वकील का कहना है कि मेडिकल आधार पर उन्हें रहम की ज्यादा जरूरत थी, जो उन्हें नहीं मिली. हालांकि जायसवाल इसमें कानूनी पेंच देखती हैं, "उन्होंने मानवीय आधार की बजाय दया याचिका पर फैसला होने की बात की थी, जो उचित नहीं है. इस तरह से तो कोई भी दया याचिका दायर कर समर्पण करने से मना कर देगा. कोर्ट जमानत अर्जियों पर सुनवाई करने से ही इनकार कर देंगी."

संजय दत्त को 1993 के मुंबई बम धमाकों में शुरू में छह साल की सजा हुई थी, जो बाद में घटा कर पांच साल कर दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इशारा कर दिया है कि आखिरी रियायत मिल चुकी है लेकिन मुंबई के मशहूर वकील माजिद मेमन का मानना है कि "वक्त मिल चुका है" और दत्त रियायत के लिए कोई और रास्ता निकाल सकते हैं, "उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने से कोई नहीं रोक सकता. हमें चार हफ्ते तक इंतजार कर यह देखना होगा कि क्या वो और ज्यादा मजबूत कोई दलील लेकर आते हैं."

रिपोर्टः निखिल रंजन

संपादनः अनवर जे अशरफ

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