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दुनिया

सहयोग बढ़ाने पर रजामंद ईरान

ईरान के नए परमाणु ऊर्जा प्रमुख ने संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी एजेंसी के साथ ज्यादा सहयोग करने की शपथ ली है. ईरान के संदिग्ध परमाणु कार्यक्रम पर दोनों पक्षों की बातचीत से पहले नरम रुख के संकेत मिले हैं.

नए परमाणु ऊर्जा प्रमुख अली अकबर सालेही ने कहा कि उनका देश इस बात की भी उम्मीद रखता है कि बड़े देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत का अच्छा नतीजा निकलेगा. उनके मुताबिक सभी पक्षों को अच्छे इरादों के साथ बातचीत में शामिल होना चाहिए ताकि मुद्दों को निपटाया जा सके. जून में हुए चुनावों ने ईरान की सत्ता उदारवादी हसन रोहानी के हाथ में सौंपी है. राष्ट्रपति हसन रोहानी और परमाणु कूटनीति के लिए उनके नियुक्त किए वरिष्ठ अधिकारियों ने समान विचार वाले लोगों का एक गुट बनाया है. उनका कहना है कि अगर दूसरा पक्ष चाहता है तो इस मुद्दे पर समझौता हो सकता है.

सालेही का कहना है, "ईरानी पक्ष की तरफ से हमेशा कोशिश होती रही, इस बार हम पूरी तरह तैयार हैं और इसके हल की इच्छा रखते हैं." ईरान पश्चिमी देशों के साथ परमाणु उर्जा के मसले पर उलझा हुआ है. पश्चिमी देशों का आरोप है कि वह परमाणु बम बना रहा है जिससे ईरान इनकार करता है.

सालेही ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग में भाषण दिया और फिर उसके बाद पत्रकारों से बात की. दोनों जगह की गई उनकी बातों से टकराव को कम करने वाले रुख का संकेत मिल रहा है. महमूद अहमदीनेजाद के सत्ता से हटने और रोहानी के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही ईरान के रुख में नरमी महसूस की जा रही है.

हालांकि रोहानी की तरह सालेही ने भी यह जोर दे कर कहा है कि ईरान कभी भी नागरिक उद्देश्यों के लिए परमाणु कार्यक्रम के अपने अधिकार पर "समझौता" नहीं करेगा. इसके साथ ही उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि ईरान यूरेनियम संवर्धन के कार्यक्रम को छोड़ने के लिए तैयार होगा. ईरान के परमाणु कार्यक्रम का यही हिस्सा पश्चिमी देशों को सबसे ज्यादा परेशान किए हुए है. उन्हें लगता है कि इस संवर्धन के कारण ईरान परमाणु हथियार बनाने लायक यूरेनियम हासिल करने से महज एक कदम दूर है. सालेही ने पत्रकारों से कहा, "इन मामलों पर बातचीत के दौरान चर्चा होगी."

उधर मास्को में रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव ने कहा है कि ईरान उच्च स्तर के संवर्धन पर दुनिया के छह ताकतवर देशों के साथ बातचीत के लिए तैयार है. इन देशों में रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी शामिल हैं. लावरोव का कहना है, "यह एक बहुत अहम कदम होगा. इसमें सबसे ज्यादा अहम यह है कि छह शक्तिशाली देशों ने भी इस समझौते पर उसी तरह की प्रतिक्रिया दी है."

ईरान और छह ताकतवर देशों के बीच बातचीत शुरू करने के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है लेकिन न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की सालाना आम सभा के दौरान इस पर अलग से बातचीत हो सकती है.

एनआर/एमजे (रॉयटर्स)

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