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दुनिया

सर्बियाई लड़ाके पूर्वी यूक्रेन में

पूर्वी यूक्रेन में लड़ाई में यह साफ नहीं है कि वहां कौन कौन लड़ रहा है. बेलग्रेड का कहना है कि पूर्वी यूक्रेन में सर्बियाई लड़ाके रूस समर्थक अलगाववादियों के साथ लड़ रहे हैं. और सिर्फ वही नहीं हैं जो वहां सक्रिय हैं.

बढ़ी हुई दाढ़ी और ऑटोमैटिक हथियार ब्रातिस्लाव सिवकोविच की छवि का हिस्सा हैं. 39 साल के ब्रातिस्लाव पूर्वी यूक्रेन में सर्ब चेतनिक मिलिशिया के नेता हैं. मार्च के दौरान वह क्रीमिया में भी थे जहां उन्होंने रुसी भाइयों का साथ दिया, अब ब्रातिस्लाव और उनके कॉमरेड फिर सुर्खियों में हैं. रूस समर्थक अलगाववादियों के पीपल्स मिलिशिया के मुताबिक पूर्वी यूक्रेन में सर्ब लड़ाकों ने लुगांस्क के पास यूक्रेनी सेना के हमले का करारा जवाब दिया.

क्रीमिया में

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रूसी, चेचन्याई और कोजैक लड़ाके रूस समर्थक अलगाववादियों को मदद कर रहे हैं. रूस के आरआईए नोवोस्ती न्यूज एजेंसी ने लिखा है कि दो फासीवाद विरोधी स्पेनिश और चेक लड़ाके भी मदद के लिए पहुंचे.

सर्बियाई चेतनिक मूवमेंट के सोरान आंद्रेजिच के मुताबिक यूक्रेन की चेतनिक यूनिट में 46 सदस्य हैं, इनमें रूसी, बुल्गेरियाई भी शामिल हैं. सर्बियाई गुरिल्लाओं ने दूसरे विश्व युद्ध में चेतनिक नाम से लड़ाई लड़ी थी और 1990 के युगोस्लाविया युद्ध में सर्बियाई अर्धसैनिक बलों ने भी. आंद्रेजिच का दावा है कि जुलाई के मध्य में उनके साथी मॉस्को भाग गए थे वहां से उन्होंने लुगांस्क को मानवीय मदद दी.

आंद्रेजिच ने डीडबल्यू को बताया, "यूक्रेनी सीमा पर हमारे आदमियों को हथियार मिले ताकि हम कारवां की रक्षा कर सकें. लुगांस्क एयरपोर्ट पर हमला हुआ और हमारे तीन कॉमरेड घायल हुए." इसलिए न्यू रशियन पीपल्स मिलिशिया बनाना तय किया गया. उन्होंने यह भी बताया कि पहले रूसी और कोजैक लड़ाकों ने सर्बिया की मदद की थी.

बेलग्रेड में सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ सोरान द्रागिसिच ने कहा कि इस तरह के लड़ाके पैसे की बजाए आदर्श में विश्वास रखते हैं. द्रागिसिच ने डॉयचे वेले को बताया, ये किराये के लड़ाके हैं जिन्हें दुनिया भर में सिर्फ लड़ने के लिए ही तैयार किया गया है. सदी की शुरुआत में वो अफ्रीका के युद्ध क्षेत्र में लड़ते थे. आज वो सीरिया, इराक और यूक्रेन जा रहे हैं."

सर्बिया के इन लड़ाकों को अक्सर "वॉर डॉग्स" कहा जाता है. लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ जोर देकर कहते हैं कि सर्बिया की आर्थिक स्थिति इसका कारण नहीं है क्योंकि जर्मनी और नीदरलैंड्स जैसे देश भी वॉर टूरिज्म से जूझ रहे हैं.

यूक्रेन में मौजूद 90 फीसदी सर्बियाई लड़ाके किराए के हैं. सर्बिया के प्रधानमंत्री अलेक्सांडर वुचिच ने बेलग्रेड में पत्रकारों को बताया कि कई दर्जन लड़ाके अलगाववादियों की तरफ से लड़ रहे हैं और कई यूक्रेनी सेना के लिए भी. वुचिच कहते हैं, "उन्हें किसी तीसरे के लिए लड़ने की बजाए घर आकर अपने परिवारों की देखभाल करनी चाहिए."

बेलग्रेड एक कानून बनाना चाहता है जो विदेश के युद्ध में शामिल होने पर दंड देगा. यह कानून यूक्रेन में सर्बियाई लड़ाकों के लिए तो है ही लेकिन मध्यपूर्व में जिहाद के लिए गए मुस्लिम सर्बों के लिए भी हैं. हालांकि शायद जब तक कानून बनेगा तब तक लड़ाके बिना किसी दंड के देश लौट जाएंगे.

रिपोर्टः रुजेविच नेमान्जा/एएम

संपादनः महेश झा

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