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मंथन

सर्न में डार्क मैटर की खोज

2008 में दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला में ब्रह्मांड की उत्पत्ति को समझने के लिए प्रयोग शुरू हुआ. वैज्ञानिकों ने दिव्य कण तो खोज निकाला. अब कुछ और बदलाव किये जा रहे हैं ताकि वो पकड़ में आ जाए जो निराकार है.

लेक जेनेवा और यूरा पहाड़ियों के बीच वह मशीन है जिसमें दिव्य कण यानी गॉड पार्टिकल की खोज हुई. 27 किलोमीटर लंबी सुरंग चुंबक से बनी है और इसमें चार सेंसर हैं. वैज्ञानिक यहां पार्टिकल एक्सेलेरेट करते हैं. वो आपस में टकराते हैं. टक्कर से डिटेक्टर में मैटर पार्टिकल निकलते हैं, माना जाता है कि इन्हीं से अणु की रचना होती हैं.

पकड़ में आया मायॉन

हो सकता है कि एक दिन वैज्ञानिकों को पता चल जाए कि अणु किस तत्व से बनता है. लेकिन इसके लिए रिसर्चरों को अपना डिटेक्टर और संवेदनशील बनाना होगा. जमीन के कई मीटर नीचे एक मायॉन चेंबर बनाया गया है. मायॉन बहुत ही स्थिर और भारी कण होते हैं जो एटलस नाम के डिटेक्टर को पार कर सकते हैं. भौतिकशास्त्रियों के लिए मायॉन नई तरह के मैटर पार्टिकल का सबूत है.

खास तरह का डिटेक्टर मायॉन का रास्ता और उसकी ऊर्जा माप सकता है. इसमें 400 नलियां हैं जिनमें कम रिएक्ट करने वाली स्थिर गैस और एक तार होता है. मापने वाला उपकरण डिटेक्टर की एक परत में लगाया जाता है जो एक फुटबॉल के मैदान जितना बड़ा है. म्यूनिख के माक्स प्लांक इंस्टिट्यूट फॉर फिजिक्स के हूबर्ट क्रोहा कहते हैं, "हमने पूरे एटलस डिटेक्टर में 1,200 ऐसे मायॉन डिटेक्टर लगाए हैं यानी करीब दस लाख तारें इसमें लगी हैं. मायॉन नलियों की एक तार केवल कुछ माइक्रोमीटर की होती है. इन्हें बनाना अपने आप में चुनौती है."

भौतिकशास्त्री डिटेक्टर की दूसरी परत बना रहे हैं. यह एटलस के बीच में लगाई जाएगी. यह वह जगह है जहां अणु के अंदर के छोटे कण एक दूसरे से टकराते हैं और इनसे और भी छोटे पार्टिकल निकलते हैं. सेंसर से इनका रास्ता पता चल सकेगा. सेंसर में 1.2 करोड़ पिक्सल फैले हुए हैं. एटलस डिटेक्टर में जो भी डाटा पैदा होगा उसका 10 फीसदी तो इस परत में मिल ही जाएगा.

एक छत के नीचे विज्ञान जगत

सर्न में काम कर रहे वैज्ञानिकों को नए विचारों का भी इंतजार रहता है. डानियल आडाम डोबोस कहते हैं, "हर दिन हमारे पास नई चुनौतियां होती हैं, नए साथी होते हैं. आप दुनिया भर के विश्वविद्यालयों और नए लोगों से मिलते हैं. वे नए डिटेक्टरों और विचारों के साथ आते हैं और हम उन्हें यहां साथ लाने की कोशिश करते हैं.".

35 देशों के 170 संस्थान एटलस डिटेक्टर पर काम कर रहे हैं. स्टैनफर्ड लीनियर ऐक्सेलेरेटर सेंटर के डॉन्ग सू भी यहां आते रहते हैं, "सर्न इस वक्त पार्टिकल फिजिक्स का केंद्र हैं. अमेरिका में हम भी भविष्य में और विकल्पों के बारे में सोचेंगे. शायद हमारे पास भी कभी ऐसे उपकरण हों."

निराकार डार्क मैटर

आने वाले साल में निर्माण पूरा हो जाएगा. फिर शोधकर्ता पदार्थ यानी मैटर का शोध एक ऐसे ऊर्जा क्षेत्र में कर सकते हैं, जो अब तक धरती पर बनाया नहीं जा सका है. इससे पदार्थ को बनाने वाले अतिसूक्ष्म कणों का पता चलेगा. सूची में सबसे ऊपर है डार्क मैटर. क्रोहा कहते हैं, "लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर में कुछ मिले या न मिले, वह पार्टिकल फिजिक्स का भविष्य तय करेगा. खास तौर से अगर डार्क मैटर ढूंढा जा सके, तो पार्टिकल भौतिकशास्त्री ही नहीं बल्कि खगोल विद और खगोल भौतिकी के रिसर्चर भी बहुत खुश होंगे."

अंतरिक्ष में डार्क मैटर का ज्यादातर हिस्सा दिखाई नहीं देता. उसका पता सिर्फ गुरुत्वाकर्षण से चलता है. यह सिद्धांत है और इसके रहस्यों को सुलझाना जीवन की गुत्थी सुलझाने जैसा होगा.

रिपोर्ट: कोर्नेलिया बोरमन/मानसी गोपालकृष्णन

संपादन: ओंकार सिंह जनौटी

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