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दुनिया

सर्द लुलिया में फेसबुक की गर्मी

लुलिया शहर के बारे में कम ही लोगों ने सुना होगा. लेकिन फेसबुक यूजर हों, तो शायद उनकी कोई तस्वीर इंटरनेट पर सफर करते हुए आर्कटिक के इस हिस्से में स्वीडन के इस शहर से होकर गुजरी हो.

फेसबुक ने कोई दो साल पहले तय किया कि वह अमेरिका के बाहर अपना पहला डाटा केंद्र लुलिया में ही खोलेगा. यह जगह राजधानी स्टॉकहोम से 725 किलोमीटर दूर है. जबरदस्त सर्दी वाला शहर.

फुटबॉल के पांच ग्राउंड जितने आकार के दफ्तर को अगले साल शुरू करना है. इसके मैनेजर योएल क्येलग्रेन का कहना है, "वहां की आर्थिक स्थिति पहले से ही बहुत अच्छी थी, इसलिए हम लोग यहां पहुंच गए." आईटी और टेलीकॉम के मामले में इस शहर का अच्छा रिकॉर्ड रहा है.

लेकिन फेसबुक के लिए सबसे अच्छी बात इस शहर की बिजली है. 1970 के बाद से यहां कभी बिजली नहीं कटी है. इसके अलावा ये पनबिजली के तौर पर साफ बिजली का भी इस्तेमाल करते हैं. वहां की सरकार ने 10 करोड़ क्रोनर के निवेश की बात कही है और इसका मौसम भी एक खास वजह रहा है.

आर्कटिक सर्किल से सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लुलिया का औसत तापमान कभी भी 10 डिग्री के पार नहीं पहुंचता है. सिर्फ गर्मी के तीन महीनों में पारा थोड़ा ऊपर चढ़ता है. फेसबुक के लिए फायदा है कि वह अपने सर्वरों को बाहरी हवा से ही ठंडा रख सकता है और इसके लिए खास उपकरण लगाने की जरूरत नहीं. जाहिर है, इससे बिजली की अच्छी खासी बचत हो सकती है.

क्येलग्रेन का कहना है, "हॉल विशाल दिखता है और लगता है कि सारे संचार में कितना ज्यादा ऊर्जा लगती होगी." लेकिन उनका कहना है कि एक आम फेसबुक यूजर पूरे साल सिर्फ तीन केले या एक कॉफी में खर्च की गई कैलोरी जितनी ऊर्जा खर्च करता है.

Lappland Winterlandschaft

लुलिया का तापमान कभी 10 से ऊपर नहीं जाता...

लुलिया ने अभी भी फेसबुक की मौजूदगी का पूरा रंग ढंग नहीं देखा है. दो सर्वर हॉल इस साल की गर्मियों में खोले गए और बचे हुए दो अगले साल 2014 में खोले जाएंगे. और यह तो सिर्फ शुरुआत है. मौजूदा इमारत के पास दो ऐसी ही विशालकाय इमारतों की जगह है. अगर जरूरत पड़ी तो कुल 12 सर्वर हॉल लगाए जाएंगे. हालांकि पहले सर्वर के खुलने के बाद भी अभी तय नहीं हो पाया है कि फेसबुक ने यहां के 46000 लोगों का जीवन किस तरह बदला है. हालांकि बिजनेस करने वालों को इस बात की खुशी है कि उनका छोटा सा शहर दुनिया के नक्शे पर दिख रहा है.

समर्थन करने वालों में लुलिया बिजनेस एजेंसी के सीईओ मार्स एंगमन भी हैं, जिन्होंने 2009 में अमेरिका के पालो अल्टो में फेसबुक के दफ्तर का दौरा किया और इस डील को पूरी करने में बड़ी भूमिका निभाई. इसके दो साल बाद ही पहले सर्वर हॉल पर काम शुरू हुआ. एंगमन का कहना है, "इसकी वजह से 750 निर्माण कर्मचारियों की नौकरी पैदा हुई और वह अभी भी काम कर रहे हैं." इस सर्वर हॉल में 50 से 100 लोगों से ज्यादा काम नहीं करेंगे, लेकिन एंगमन को उम्मीद है कि इससे 300 नई नौकरियां जरूर पैदा होंगीं.

हालांकि फेसबुक की वजह से शहर की पहचान बढ़ी है और यहां के बिजनेस को भी इसका फायदा हो रहा है. साइंस पार्क की लगभग 100 कंपनियों में 1100 लोग काम करते हैं और यह देश में सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाली जगहों में शामिल है. एंगमन को उम्मीद है कि आने वाले 10 साल में यहां 200 अरब क्रोनर का कारोबार हो सकेगा, "सारे ग्राफ सही दिशा में इशारा कर रहे हैं."

हालांकि आलोचकों का कहना है कि अब तक सिर्फ कुछ नौकरियां ही दी गई हैं और उनमें से भी ज्यादातर कम दक्षता वाली. लुलिया यूनिवर्सिटी में बिजनेस प्रोफेसर हाकन लिनेनपेये का कहना है, "हमें तो अब तक कोई बड़ा फर्क नहीं दिखा. पहली इमारत का एक असर यह रहा कि 100 लोगों को नौकरी मिली, लेकिन वे भी दक्ष कामगार नहीं हैं."

एजेए/एमजी (एएफपी)

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