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दुनिया

सरे आम की दलित की हत्या

तमिलनाडु के तिरुपुर में रविवार को सरे आम एक दलित छात्र की हत्या कर दी गयी. इस व्यक्ति ने उच्च जाति की लड़की से शादी की थी. इसी को हत्या का कारण माना जा रहा है.

स्थानीय पुलिस कमिश्नर एन मंजुनाथ ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि 22 वर्ष का यह युवक अपनी 19 साल की पत्नी के साथ बाजार में था, जब उन दोनों पर एक बस स्टॉप के पास हमला किया गया. युवक पर कई बार दरांती से वार किया गया. युवती जब बीच बचाव करने आई, तो उस पर भी वार किया गया. उसके सिर पर चोटें आई हैं. सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि इस दौरान बस स्टॉप के आसपास कई लोग मौजूद थे लेकिन किसी ने हमलावरों को रोकने की कोशिश नहीं की. मोटरबाइक पर सवार तीनों हमलावर इसके बाद वहां से फरार हो गए.

पुलिस का कहना है कि उसने सीसीटीवी से ली गयी तस्वीरों के आधार पर हमलावरों की खोज शुरू कर दी है. जोड़े को कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां युवक को मृत घोषित कर दिया गया और युवती फिलहाल आईसीयू में भर्ती है. माना जा रहा है कि हमला लड़की के परिवार ने कराया. मंजुनाथ ने बताया, "उन्होंने करीब आठ महीने पहले शादी की थी और लड़की का परिवार इससे खुश नहीं था. वह उच्च थेवर हिंदू जाति की है, जबकि लड़का दलित था." टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार लड़के के परिवार ने शादी को स्वीकार लिया था, जब कि लड़की के परिवार की ओर से जोड़े को धमकी दी गयी थी.

यह मामला ऐसे वक्त में आया है जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य एससी सिंहा ने मीडिया से "शहरी और मध्य वर्ग" की जगह "पिछड़े और कमजोर" तबकों पर ज्यादा ध्यान

देने की अपील की है. हाल ही में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए के प्रमुख रह चुके सिंहा ने कहा, "हाल के दिनों में देखा गया है कि मेनस्ट्रीम मीडिया समाज के बड़े वर्ग, जिसमें दलित, आदिवासी, महिलाएं, ग्रामीण और गरीब शामिल हैं, उन पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहा है. ऐसा लगता है जैसे शहरी एलीट और मध्य वर्ग के खिलाफ हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों को ही मीडिया जगह देने लायक समझता है."

बहरहाल तमिलनाडु में यह ऑनर किलिंग का पहला मामला नहीं है. परिवार के सम्मान के लिए अपनों की जान लेने के बारे में भारत में सही आंकड़े उपलब्ध नहीं है लेकिन संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दुनिया भर में होने वाली इस तरह की हत्याओं में भारत सबसे आगे हैं. सालाना दर्ज होने वाले 5,000 में से 1,000 ऐसे मामले भारत के ही होते हैं.

आईबी/एमजे (डीपीए, एएफपी)

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