1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

सरकार ने सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति का बचाव किया

भ्रष्टाचार के मामले का सामना कर रहे भारत के सीवीसी पीजे थॉमस की नियुक्ति के फैसले का यूपीए सरकार ने जमकर बचाव किया है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे में कहा कि पीजे थॉमस बेदाग छवि के बेहतरीन अधिकारी हैं.

default

सुप्रीम कोर्ट

पीजे थॉमस पॉमोलीन तेल घोटाले में केरल की एक अदालत में भ्रष्टाचार के मामले का सामना कर रहे हैं. सतर्कता आयुक्त के पद पर थॉमस की नियुक्ति का फैसला विवादों में रहा है. विपक्षी बीजेपी ने थॉमस की दागदार छवि का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने का फैसला किया लेकिन केंद्र सरकार अपने इस फैसले से पीछे नहीं हटी. विरोध दर्ज कराते हुए बीजेपी ने थॉमस के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा नहीं लिया.

थॉमस को सतर्कता आयुक्त बनाए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसके जवाब में केंद्र ने यह जवाब दिया है. इसमें सरकार की ओर से दायर एक हलफनामे में कहा गया है कि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति पर तीन सदस्यीय समिति का आम राय से फैसला लेना जरूरी नहीं है.

इस समिति में दो नेता सत्ताधारी पार्टी से और एक नेता विपक्षी पार्टी का होता है. याचिकाकर्ता का कहना है कि केरल के पॉमोलीन आयात केस में थॉमस को आरोपी बनाया गया है. लेकिन सरकार का कहना है कि 2007 में उस वक्त के सतर्कता आयुक्त ने साफ कर दिया कि थॉमस पर लगे आरोप सही नहीं हैं.

इसके बाद 2010 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पीजे थॉमस को सतर्कता आयुक्त बनाए जाने को हरी झंडी दिखाई लेकिन समिति के तीसरे सदस्य के रूप में विपक्षी नेता सुषमा स्वराज इस नाम से सहमत नहीं थीं.

अपने विरोध के लिए सुषमा स्वराज ने पीजे थॉमस की कथित दागदार छवि का हवाला दिया. अब सरकार की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि थॉमस को सतर्कता आयुक्त बनाए जाने में कानून का उल्लंघन नहीं किया गया है और इस पद के लिए उनकी योग्यता सुप्रीम कोर्ट को तय नहीं करनी चाहिए. "यह बात मान ली जानी चाहिए कि किसी पद के लिए अधिकारी की योग्यता उन्हें चुनने वाले पैनल पर ही छोड़ देना चाहिए."

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: ए जमाल

DW.COM

WWW-Links