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जर्मन चुनाव

सरकार तय करेगी गैस की कीमतः सुप्रीम कोर्ट

अंबानी बंधुओं यानी मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच चले आ रहे गैस विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बड़े भाई मुकेश की तरफ झुकता दिखता है. हालांकि कोर्ट ने साफ किया है कि गैस की कीमत तय करना सरकार का काम है.

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कृष्णा गोदावरी बेसिन की गैस किस दर पर बेची जाएगी, इसी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया. इस मामले में अरबपति अंबानी भाइयों के अलावा भारत सरकार भी शामिल है. अनिल अंबानी चाहते थे कि बड़े भाई 2005 में पारिवारिक संपत्तियों के बंटवारे के समय हुए करार के हिसाब से चले और गैस सस्ती दरों पर दें. यह मुकेश अंबानी की कंपनी को मंज़ूर नहीं था. अनिल अंबानी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सुनने के लिए अदालत पहुंचे लेकिन फैसले के बाद बिना मीडिया से बातचीत किए चले गए.

Mukesh Ambani, Industrialist, Indien

बड़े भाई को फायदा

अदालत ने आदेश दिया कि गैस की कीमतों को तय करने के लिए छह हफ्ते के अंदर बातचीत शुरू हो जानी चाहिए. कोर्ट ने साफ किया कि जो कुछ भी तय हो, वह सरकार के नियमों के तहत होना चाहिए. अदालत का कहना है कि प्राकृतिक गैस संपत्ति किसी परिवार की मिलकियत नहीं हो सकती. सुप्रीम कोर्ट का फैसला चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता में तीन जजों की पीठ ने सुनाया.

केजी बेसिन से गैस आपूर्ति करने का ठेका मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ (RIL) के पास है. गैस, पावर प्लांट चलाने के लिए अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्स लिमिटेड को बेची जानी है. अनिल अंबानी का कहना है कि गैस 2005 में हुए पारिवारिक करार के तहत सस्ती दरों पर मिलनी चाहिए. यह क़ीमत सरकारी रेट से क़रीब आधी है.

दोनों भाइयों के विवाद में सरकार भी शामिल है. मुकेश अंबानी का कहना है कि अनिल की कंपनी जिस रेट पर गैस सप्लाई चाहती है, वह मुमकिन नहीं है. मुकेश के मुताबिक अनिल की कंपनी को 17 साल तक गैस सप्लाई करने के करार को सरकार की मंज़ूरी नहीं मिली है. बड़े भाई का कहना है कि उनकी कंपनी सरकारी रेट पर गैस बेचेगी. मुकेश का तर्क था कि गैस सरकार की संपत्ति है उनकी कंपनी तो बस ठेकेदार है.

Anil Ambani, Industrialist

छोटे ने मीडिया से बात नहीं की

पूरे विवाद पर सरकार का कहना है कि गैस को लेकर किसी तरह के पारिवारिक करार को नहीं माना जाएगा. गैस सरकार की है, इसलिए कीमत को लेकर केंद्र की अनुमति के बिना दो निजी पक्ष करार नहीं कर सकते. सरकार का कहना है कि उसने गैस की कीमत तय करने के लिए एक नया फॉर्मूला तैयार किया है.

भारत अपनी ऊर्जा की ज़रूरत पूरी करने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है. 70 फ़ीसदी ऊर्जा संबंधी ज़रूरतें आयात से पूरी की जाती है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला गैस आपूर्ति को लेकर सरकार का बोझ कम कर सकता है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

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