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दुनिया

सम्मान के नाम पर बाल विवाह

पाकिस्तान में पांच साल की सनीदा एक दोपहर जैसे ही स्कूल से घर पहुंची, उसके पिता ने उसे बुलाया. पिता सनीदा की शादी किसी से सम्मान की खातिर कर देना चाहते थे.

कुछ महीने पहले सनीदा के पिता अली अहमद घाटी की एक दूसरी लड़की के साथ भाग गए. लड़की का परिवार बदला न ले, इसके लिए अली अहमद ने अपनी लड़की और भतीजी सपना की उनके यहां शादी कर देने का वादा कर दिया.

बच्चियों को अपनी गलतियों की सजा भुगतने या सामाजिक सम्मान की बलि चढ़ाने की परंपरा पाकिस्तान के कई रूढ़िवादी इलाकों में चली आ रही है. सनीदा का घर पश्चिमोत्तर स्वात घाटी में है. छोटी बच्चियों की इस तरह शादी करा दिए जाने की परंपरा का नाम स्वारा है.

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि ये घटनाएं स्वात में बढ़ रही है. 2013 में दर्ज ऐसी शादियों की संख्या नौ थी लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वास्तव में ये आंकड़ा बहुत ज्यादा है.

लाल बैंगनी कसीदे वाली, सुनहरी शाल ओढ़े सनीदा ने बताया, "पापा ने मुझे गली में रोका और बताया कि उन्होंने मुझे स्वारा में दे दिया है और वह जल्दी ही मुझे एक आदमी के हवाले कर देंगे, जो मेरा पति होगा."

पहले तो लड़की की मां ने मना किया लेकिन चूंकि उपाय जिरगा (कबायली पंचायत) ने बताया था तो मामले की गंभीरता जल्द ही सामने आ गई. सनीदा के मामा ने बताया, "पहले हमें लगा कि वह लड़की को नहीं ले जाएंगे लेकिन हर दिन वह हम पर दबाव बनाने लगे कि इसे स्वारा में दे दो."

सनीदा की सुरक्षा के लिए उसके परिवार को अदालती आदेश तो मिल गए, पुलिस ने उसके पिता और जिरगा के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया, जिन्होंने बच्ची को स्वारा में देने का फैसला किया था. लेकिन इससे सनीदा की जिंदगी दूभर हो गई. अब दो साल बीत जाने के बाद भी उसका मजाक उड़ाया जाता है और उसके साथ भेदभाव किया जाता है. "जब भी मैं स्कूल जाती हूं तो बच्चे मुझे चिढ़ाते हैं कि मुझे स्वारा में दिया गया है और जल्दी ही मेरी शादी हो जाएगी."

सनीदा की किस्मत अच्छी थी कि उसके परिवार ने जिरगा के फैसले का विरोध किया. पाकिस्तान में, जहां परिवार का सम्मान सबसे ऊंचा माना जाता है, ऐसे में इस तरह की हुज्जत कोई नहीं करवाता. कई मामले तो पुलिस और अदालत तक पहुंच ही नहीं पाते. लोग कहते हैं कि वो अपनी औरतों के मामले अदातल में नहीं ले जाते.

अधिकारी स्वारा के विस्तृत आंकड़े नहीं रखते. इस विषय पर एक एक्टिविस्ट समर मिनल्लाह ने एक डॉक्युमेंट्री बनाई. उन्होंने पाया कि 2012 के दौरान स्वारा के 132 मामले थे.

वहीं 16 साल की सपना के लिए कोई रियायत नहीं थी. उसे जिरगा का फैसला मानना पड़ा और शादी करनी पड़ी.

स्वारा के तहत होने वाली जबरदस्ती शादी लेकिन पुलिस का कहना है कि भले ही शिकायत आए लेकिन गवाह ज्यादा बताने से हिचकिचाते हैं. मिंगोरा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नावीद खान बताते हैं, "स्वारा के मामले में लोग एक दूसरे के खिलाफ गवाही नहीं देते, क्योंकि वो एक ही गांव और समुदाय के होते हैं. 2012 में सभी 12 आरोपियों को छोड़ना पड़ा क्योंकि उनके खिलाफ गवाही पर्याप्त नहीं थी. ऐसे मामलों में कोई नहीं बोलता."

2013 में स्वारा के मामलों में 65 संदिग्धों को पकड़ा गया जिसमें सनीदा के पिता भी शामिल थे. महिलाओं को भी इस मामले में जागरूक किया जा रहा है. लेकिन मिनल्लाह कहती हैं कि जब तक पुलिस और अधिकारी जिरगा को चुनौती नहीं देते, कोई बदलाव नहीं आएगा. उनके मुताबिक, "लोगों में स्वारा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई गई है इसलिए ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं. लेकिन अधिकारियों को जिरगा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी ताकि वे कानून को न तोड़ सकें." वहीं मिंगोरा में वकील सैयद करीम शालमान कहते हैं, "अगर कबीलों के बीच जारी कड़वी दुश्मनी को किसी तरह खत्म किया जाए तो कई सौ जानें बचेंगी और परिवारों में शांति आएगी. अगर स्वारा में आई लड़की के साथ अक्सर ससुराल में बुरा सलूक किया जाता है क्योंकि उसे प्रतिशोध के तौर पर दिया जाता है."

एएम/एजेए (एएफपी)

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