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ब्लॉग

समस्या एक शिखर भेंट अनेक

रविवार को ग्रीस के लिए एक और अल्टिमेटम का दिन है. यूरोपीय संघ के एक विशेष शिखर सम्मेलन में ग्रीस के भविष्य पर फैसला होगा. बैर्न्ड रीगर्ट का मानना है कि योजना बहुत ही महत्वाकांक्षी है.

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यूरोपीय संसद में सिप्रास

बड़ी मुश्किल से यूरोजोन के देश विद्रोही ग्रीस को लाइन पर लाने के लिए एक अंतिम प्रयास के लिए राजी हुए हैं. इसमें कामयाबी संदेहपूर्ण है. वामपंथी अलेक्सिस सिप्रास के साथ विवाद में समय सीमा, अंतिम समय सीमा, एकदम आखिरी समय सीमा अक्सर तय किए गए हैं. विश्वास करना कठिन है कि अगले रविवार तक तय समय सीमा रहेगी और नतीजे देगी.

जनमत संग्रह के नतीजे को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसमें ग्रीस की जनता ने दूसरे बेलआउट प्रोग्राम को घातक रूप से नकार दिया था. अब एक नया, तीसरा और भी बड़ा राहत पैकेज ग्रीस की रक्षा करने, स्वाभाविक रूप से नई शर्तों के साथ. कानूनी तौर पर तय इस कार्यक्रम की शर्तें ठीक से देखने पर और सख्त लगती हैं. क्या इस समय जीत का जश्न मना रहे सिप्रास इसे लागू करा पाएंगे? क्या यूरोजोन के देशों की संसद आने वाले दो सालों में और अरबों का निवेश करने को तैयार होंगी? क्या अब तक गैरजिम्मेदाराना बर्ताव कर रहे प्रधानमंत्री सिप्रास पर सचमुच भरोसा किया जा सकता है?

Brüssel Beratungen Finanzkrise

प्रमुख यूरो नेताओं के साथ सिप्रास

पीछे की ओर छलांग

यह सब रविवार तक पता चलेगा. तब तक व्यापक राहत प्रोग्राम तैयार करने की जिम्मेदारी है. ग्रीस को आवेदन और दस्तावेज देने हैं. देखना होगा कि यह होता भी है. उसके बाद उन दस्तावेजों की जांच करनी होगी. और फिर यूरोपीय संघ को घोषणा करनी होगी कि यूरोजोन की स्थिरता खतरे में हैं. यह राहत कोष ईएसएम को सक्रिय करने की शर्त है. अब तक यूरोपीय आयोग कहता रहा है कि ग्रीस का संकट यूरोजोन के लिए कोई खतरा नहीं है. यह मामला दिखाता है कि ग्रीस को बचाने की कार्रवाई बहुत ठोस नहीं है. हो भी कैसे? ये आखिरी मौका बर्लिन और पेरिस के रणनीतिज्ञों ने बहुत सोचे समझे बिना फटाफट निकाला है.

दोनों पक्षों में सदिच्छा होने पर अप्रैल में ही जरूरी राहत पैकेज पर गंभीरता से बात हो सकती थी. समय के दबाव की जिम्मेदारी ग्रीस की सरकार की है जिसने देश को वित्तीय संकट में धकेल दिया है. पेंशनरों को बंधक बनाकर अलेक्सिस सिप्रास ने वार्ता में एक अंतिम मौका हासिल किया है. यदि वे अब इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं तो ग्रेक्जिट यानि ग्रीस के यूरोजोन से बाहर निकलने को रोकना संभव नहीं होगा.

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