1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

समलैंगिकों को गोद लेने का अधिकार

तलाक के बाद बच्चे मां के साथ रहेंगे या पिता के साथ, यह एक ऐसी बहस है जिसका समाधान कचेहरी में जा कर ही निकलता है. और तलाक की वजह अगर माता पिता में से किसी एक का समलैंगिक हो जाना हो, तो मामला और भी पेचीदा हो जाता है.

समलैंगिकों के बच्चा गोद लेने के अधिकार पर अलग अलग देशों की राय बंटी हुई है. यहां तक कि अकेले जर्मनी में ही अलग अलग तरह के कानून हैं, जो बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया को और भी उलझा देते हैं. मिसाल के तौर पर जर्मनी में एक समलैंगिक जोड़ा बच्चा गोद नहीं ले सकता. लेकिन एक गैरशादीशुदा व्यक्ति (जो समलैंगिक भी हो सकता है) को बच्चा गोद लेने की अनुमति है.

जर्मनी में समलैंगिक लोग आपस में शादी तो नहीं कर सकते, लेकिन एक सिविल बॉन्ड पर दस्तखत कर के साथ रह सकते हैं. संसद के ऊपरी सदन ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत यदि समलैंगिक जोड़े में से किसी एक ने बच्चा गोद लिया हुआ है, तो उसके पार्टनर को भी बच्चे का अभिभावक बनने का हक होगा. पिछले महीने चांसलर अंगेला मैर्केल ने संसद के निचले सदन में इसे मंजूरी दे दी थी. इस फैसले के लिए संसद में मैर्केल की काफी आलोचना हुई क्योंकि इसके बावजूद समलैंगिक जोड़ा मिलकर बच्चे गोद नहीं ले सकता. पड़ोसी देश फ्रांस पिछले साल ही इस कानून को पारित कर चुका था.

इस तरह की पेचीदगी उन मामलों में है जहां लोग शादी के कुछ साल बाद समलैंगिकता की बात करते हैं और इसी को तलाक की वजह बना देते हैं. ऐसे में क्या अपने बच्चे पर उनका क्या हक होता है, पिछले कुछ वक्त से इस पर भी बहस होती रही है.

समलैंगिकों के अधिकारों को लेकर पिछले कुछ समय से बदलाव देखे जा रहे हैं. पिछले साल एक अदालत ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि पिछली शादी से हुए बच्चों पर माता या पिता का पूरा अधिकार है. तभी से इस मामले पर बहस शुरू हुई. अदालत का कहना है कि बच्चों को अलग करना उनसे उनका अधिकार छीनना है, बच्चों का हक है कि वे अपने माता पिता के साथ रह सकें और अपने भाई बहनों के साथ भी रिश्ता बनाए रखें.

आईबी/एमजी (डीपीए)

DW.COM

संबंधित सामग्री