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दुनिया

समय जैसा फैला कैनवास है पेरिस

यूरोप के सारे ही शहरों से इतर पेरिस का एक अलग आकर्षण है. बेशक पेरिस फ्रांस की राजनीतिक राजधानी हो लेकिन इससे भी आगे वो दुनिया भर के कलाकारों और कलाप्रेमियों की राजधानी है. रोहित जोशी के पेरिस यात्रा के अनुभव.

अगर आप कलाओं के शौ​कीन हैं तो पेरिस पहुंचते ही किसी भी और चीज के बजाय आप लूव्र म्यूजियम को तलाशेंगे. कला इतिहास की सबसे मशहूर कलाकृति मोनालिसा का घर 'म्यूजी दू लूव्र'. लेकिन सिर्फ मो​नालिसा का ही नहीं ​ब​ल्कि 60,600 वर्गमीटर के दायरे में पसरा ये संग्रहालय लगभग मानव ​इतिहास की शुरूआत से लेकर अब तक की 35000 से ज्यादा महत्वपूर्ण कलाकृतियों का घर है. लेकिन इस म्यूजियम की तरफ हर साल आने वाले तकरीबन 1 करोड़ लोगों को जो कलाकृति सबसे अधिक खींचती है वो पुनर्जागरण काल के महान चित्रकार लियोनार्दो दा विंची की कलाकृति मोनालिसा ही है.

देखिए लूव्र में मोनालिसा-

लूव्र म्यूजियम

सुबह-सुबह पेरिस पहुंचने पर हम इसी संग्रहालय 'म्यूजी दू लूव्र' का रास्ता तलाश रहे थे. मोनालिसा के अलावा माइकल एंजेलो की 'डाइंग स्लेव' जैसी मशहूर मूर्तियां यहां हैं तो रेमब्रांट के कई सेल्फ पोर्ट्रेट भी. 1830 की फ्रांसीसी क्रांति पर यूजीन डेलाक्रोय की बनाई मेरी प्रिय कला​कृति, 'लिबर्टी लीडिंग द पीपल' भी इसी संग्रहालय में है.

इसके अलावा रोमन, ग्रीक, मिस्र और इस्लामी सभ्यताओं से जुड़ी कई मूर्तियां और दूसरी कलाकृतियां भी यहां बिखरी पड़ी हैं. हम सुबह तकरीबन 9:30 बजे लूव्र पहुंचे. और जब वहां से वापस निकले तो लगभग शाम के 9:30 बज रहे थे. यह एक दिन इस विशाल संग्रहालय के लिए एकदम नाकाफी था. पर हम यहां से आजीवन याद रहने वाले बहुत सारे अनुभव लेकर लौट रहे थे.

आइफेल टावर

पेरिस को किसी प्रतीक के ​जरिए दर्शाना हो तो हर कोई आइफेल टावर का रेखाचित्र ​खींचेगा. हमारा अगला दिन इसी के नाम था. ​324 मीटर ऊंचे इस्पात के इस टावर को इं​जीनियर गुस्ताव आइफेल और उनकी कंपनी के सहयोगियों ने 1889 बनाया था. उन्हीं के नाम पर इस टावर को नाम भी दिया गया. पेरिस की यह सबसे ऊंची आकृति न केवल फ्रांस बल्कि समूची दुनिया में आधुनिकता और औद्योगिकीकरण का प्रतीक है. इस टावर में तीन मंजिलें हैं जहां से आप पूरे पेरिस शहर का नजारा देख सकते हैं.

लिफ्ट ने पहले हमें टावर की दूसरी मंजिल पर उतारा. पश्चिमी क्षितिज पर सूरज ढल रहा था. जैसे जैसे सूरज की रोशनी मद्धम पड़ती गई शहर ने अपनी रंगबिरंगी रो​शनी की चादर ओढ़ ली. फिर हम तीसरी मंजिल की ओर बढ़े. देखें आइफेल की तीसरी मंजिल से रोशनी में डूबे इस शहर का नजारा.

जब हम आइफेल से नीचे उतरे तो ​अंधेरे में डूबी इस रात में आइफेल खुद लाल, पीले और सफेद रंग की रोशनी में जगमगा रहा था.

ओर्से म्यूजियम

मैं खुद चित्रकला का छात्र रहा हूं. कुमाऊं विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा कैंपस में हमें रिप्लिका बनाने के लिए पेंटिंग्स के प्रिंट्स दिए जाते थे. बढ़िया क़्वालिटी के इन प्रिंट्स को पकड़ने का एहसास अद्भुत होता था. ये एहसास कैम्पस में हमारे जूनियर्स को अब नसीब नहीं हो सकता. तब मोबाइल और इंटरनेट इतने शबाब पर नहीं था. हमारा पेंटिंग डिपार्टमेंट ही वो एक जगह थी जहां आप एक साथ इतने आर्टिस्ट का काम देख सकते थे.

यहां पेरिस में मैं उन तमाम प्रिंट्स की ऑरिजिनल पेंटिंग्स के सामने खड़ा था जिनके प्रिंट्स भी मुझे कौतुहल से भर देने के लिए काफी रहे थे. और उस पर भी यह कौतुहल तब और परवान चढ़ गया जब मैं ओर्से म्यूजियम में अपने पसंदीदा चित्रकार विंसेंट वान गॉग की मशहूर कृति 'सितारों भरी रात' (स्टारी नाइट) के सामने खड़ा था.

जो आकर्षण लूव्र में मोनालिसा का है वही आकर्षण ओर्से में उत्तर प्रभाववाद के मशहूर चित्रकार विसेंट वान गॉग का है. यूरोप आकर ही मुझे पता चला है कि वान/वैन का उच्चारण यहां फान है. यानि विंसेंट फान गॉग. विंसेंट की पूरी जिंदगी गुमनामी और भयंकर अवसाद में बीती. 30 वें साल में पेंटिंग की शुरूआत करने वाले विंसेंट जीवनभर अपनी महज एक पेंटिंग बेच सके थे. लेकिन अब वे दुनिया के सबसे मशहूर चित्रकारों में शुमार हैं. यहां ओर्से में भी हजारों महान कलाकृतियों के बीच उनके चित्रों की अलग चमक है.

ओर्से संग्रहालय में भी 1848 से लेकर 1914 तक के विविध कला आंदोलनों से जुड़ी हजारों फ्रांसीसी कलाकृतियां हैं. खासकर मोने, मानेट, देगा, रेनोआ, सेजां, सेउरत, सिसली, गोगां के अलावा कई मशहूर प्रभाववादी और उत्तर प्रभाववादी चित्रकारों के बेशकीमती रचनाकर्म को यहां की दीवारों में ​सजाया गया है. 1898 से 1900 के बीच बनाए गए एक पुराने रेलवे स्टेशन की इस भव्य ​इमारत को संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया था.

म्यूजियम जैसा शहर

पेरिस समय की तरह फैला ​एक विस्तृत कैनवास है जिसमें सदियों से अलग-अलग दौर में ढेरों कलाकार अपने-अपने रंग बिखरते आए हैं. पेरिस महज शहर नहीं खुद में एक म्यूजियम है. जहां-जहां से आप गुजरें कला संजोई मिलेगी.

पेरिस के 'रिपब्लिक मेट्रो स्टेशन' में डांस कर रही इस बच्ची से, पर्फामेंस के बाद मैंने नाम पूछा तो इसने बड़े प्यार से बताया, 'माइ नेम इज अलीशा!'. मैंने उसे सराहा और कहा, 'यू आर रिअली अ ब्यूटिफुल डांसर अलीशा!' देखें इस ​वीडियो को और क्या आप भी ये ही नहीं कहेंगे?​