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फीडबैक

समय का पाबंद मनुष्य

अक्सर हमें पाठकों से वेबसाइट, फेसबुक पर लिखे आलेखों पर उनकी प्रतिक्रियाएं आती रहती हैं. हाल ही में क्या कुछ लिखा हमारे पाठकों ने, आइए जाने…

मंथन के अंतर्गत जर्मनी की नई एवं तेज रफ्तार से चलने वाली डबल डेकर ट्रेन - इस विषय पर विडियो क्लिपिंग्स देखी तो मन प्रसन्न हुआ क्योंकि मैं भी भारतीय रेल में टीटी के रूप में कार्यरत हूं. इसलिए मुझे रेल से सम्बंधित कोई भी जानकारी बड़ी दिलचस्प लगती है. डॉयचे वेले का हिंदी प्रसारण जब रेडियो पर बंद हुआ तो मुझे इतना दुःख लगा मानो कोई मेरा जिगरी दोस्त मुझ से बिछड़ गया हो. लेकिन वक्त और हालत और दुनिया में निरंतर हो रहे आधुनिकीकरण के साथ चलते हुए जब मैंने इंटरनेट पर डीडब्ल्यू हिंदी को देखा तो खुशियों का ठिकाना न रहा. मैं 1978 से डॉयचे वेले और रेडियो बर्लिन इंटरनेशनल का श्रोता रहा हूं. मेरी दिली ख्वाहिश है कि डॉ गोएबेल ग्रोस और कमला चोपडा की आपकी चिठ्ठी मिली आप की फरमाइश कार्यक्रम के कुछ अंश ऑडियो के रूप में सुनाने का कष्ट करे.
आर.एस.विजय कुमार रेजेती, विशाखापट्टनम
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जैसा की आपको याद होगा या भूल गए होंगे कि जहीर अब्बास आपका पुराना श्रोता है जो पिछले 12 सालों से डीडब्ल्यू से जुडा हुआ है जब रेडियो हुआ करता था और पोस्टकार्ड हुआ करता था. अब इंटरनेट और ईमेल हो गया है और साथ में डीडब्ल्यू भी काफी बेहतर और ज्ञानवर्धक हो गया है. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि मेरे क्लब के लिए कुछ डीडब्ल्यू की यादें और गिफ्ट्स भेजने की कृपा करे जैसे पहले भेजते थे. धन्यवाद.
जहीर अब्बास, अलीगढ, उत्तर प्रदेश

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जर्मनों के समय पाबंदी पर एक दिलचस्प रिपोर्ट ‘समय के पाबंद जर्मन' शीर्षकीय आलेख सीरीज के अन्तर्गत पढ़ने को मिली. जर्मनी में हर एक काम वक्त पर होता है शायद इसी वजह से जर्मनी का शुमार विकसित देशों में होता है क्योंकि समय की पाबंदी सफलता की कुंजी है. देश की तरक्की के साथ-साथ लोगों की व्यक्तिगत तरक्की भी होती है साथ ही लोगों के प्रति एक भरोसा भी बढ़ता है. सामाजिक ताने बाने काफी हद तक समयबद्ध कामों पर टिके होते हैं. अच्छी बात है, लोगों को जर्मनों की समय पसन्दगी से सीखना चाहिए क्योंकि ये सिर्फ प्रेरणा नहीं बल्कि सफलता की एक शैली है.

रवि श्रीवास्तव, इण्टरनेशनल फ्रेण्डस क्लब, इलाहाबाद

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1993 के मुंबई धमाकों को देश कभी नही भूल सकता. यह ठीक है कि दहशतगर्दी की उस कायरता पूर्ण कारर्वाही से अभिनेता संजय दत्त का कोई सीधा रिश्ता नहीं था, लेकिन वह इन देशद्रोहियों के कारोबार से बखूबी वाकिफ था. संजय दत्त को मिली सजा उन पीडितों के दर्द के सामने शायद कम ही है जिनकी पूरी दुनिया ही उस हादसे के बाद बदल गई. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सम्मान करने योग्य है. कुछ लोग उन्हें माफ कर देने की मांग कर रहे हैं वे लोग इस बात को शायद नजरंदाज कर रहे है कि संजय दत्त को मिली माफी आम जनता के विश्वास को कम कर देगी. अच्छो को ध्यान में रख कर माफी दी जाने लगें तो अधिकांश अपराधी सड़क पर घूमते नजर आएगे.

डा.हेमंत कुमार, प्रियदर्शिनी रेडियो लिस्नर्स क्लब, भागलपुर, बिहार

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" ईस्टर का त्योहार " शीर्षक लाजवाब फोटोग्राफी के साथ जानकारी से भरा पेशकाश बहुत पसंद आया. मोटापे की समस्या से छुटकारा पाने के लिए क्या किया जा सकता है इस विषय पर तसवीरों के साथ जानकारी भी अच्छी लगी.

सुभाष चक्रबर्ती , नई दिल्ली

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संकलनः विनोद चड्ढा

संपादनः आभा मोंढे