समंदर में चीन से डर | दुनिया | DW | 03.12.2012
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दुनिया

समंदर में चीन से डर

भारतीय नौसेना प्रमुख ने कहा है कि बीजिंग की बढ़ती नौसेना भारत के लिए चिंता का विषय बन रहा है. उन्होंने कहा कि भारत की तेल कंपनियों को दक्षिण चीन सागर में सुरक्षा देने की पूरी कोशिश की जाएगी.

एडमिरल डीके जोशी ने कहा है कि चीन को देखते हुए भारत को भी अपनी नौसेना रणनीति में बदलाव लाने होंगे. "उनका आधुनिकीकरण काफी प्रभावशाली है. हमारे लिए यह चिंता का विषय बन रहा है और हमें अपने विकल्प और रणनीति देखनी होगी."

चीन ने अपना पहला एयरक्राफ्ट कैरियर जहाज दक्षिण चीन सागर में तैनात किया है और कई महीनों से इस इलाके में विवादित द्वीपों को लेकर फिलिपीन्स और वियतनाम के साथ बहस में फंसा हुआ है. भारत ने पिछले साल वियतनाम के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें दक्षिण चीन सागर में तेल खोजने की बात थी.

Indien Flugzeugträger Marine

भारत का युद्धपोत

चीन ने भारत से कहा है कि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए यहां तेल न खोजे. जोशी ने लेकिन कहा है कि वह इलाके में ओएनजीसी जैसी भारत तेल कंपनियों की सुरक्षा में मदद करेंगे.

जोशी का कहना है कि वह उम्मीद नहीं करते कि दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना को बहुत ज्यादा तैनात होना पड़ेगा लेकिन जहां देश के हित का सवाल है, नौसेना भारतीय कंपनियों के साथ बनी रहेगी. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना अभ्यास कर रही है.

दक्षिण चीन सागर में चीन, वियतनाम और फिलिपीन्स के साथ विवाद के बारे में जोशी ने कहा कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय संधियों के जरिए सुलझाना होगा. भारत हिंद महासागर में चीनी नौसेना के बढ़ते प्रभाव से भी चिंतित है. बीजिंग श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार में बड़े प्रॉजेक्टों पर काम कर रहा है. चीन का सैन्य बजट सालाना करीब 100 अरब डॉलर है. अमेरिकी सुरक्षा मंत्रालय पेंटागन के मुताबिक चीन हवाई सुरक्षा, पनडुब्बियों और सैटेलाइट निरोधी हथियारों में भारी मात्रा में निवेश कर रहा है. इनका इस्तेमाल दक्षिण चीन सागर में प्रतिद्वंद्वियों को रोकने के लिए किया जा सकता है.

एमजी/एएम(रॉयटर्स, एएफपी)

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