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विज्ञान

सब के बस का नहीं गणित

"गणित में तुम्हारे ही नंबर इतने कम क्यों आते हैं, तुम्हारे दोस्त तो हर बार अव्वल आते हैं", माओं की इस शिकायत से कई स्कूली बच्चे रूबरू होते हैं. उन्हें जबरन ट्यूशन भी जाना पड़ता है, लेकिन फर्क फिर भी नहीं पड़ता.

गणित अधिकतर बच्चों के पसंदीदा विषयों की सूची में जगह नहीं बना पाता. हालांकि कुछ बच्चे गणित में बेहद होनहार होते हैं, लेकिन कई बच्चों के लिए यह एक बड़ी मुसीबत है. ट्यूशन जा कर या ज्यादा देर अभ्यास कर गणित के बुरे अंकों को सुधारा तो जा सकता है, लेकिन किसी को जबरन गणित में होनहार नहीं बनाया जा सकता. अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक शोध कर इस बात को सिद्ध किया है.

स्टैंडफर्ड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन में यह शोध किया गया है. कैलिफोर्निया में हुआ यह शोध पीएनएएस नाम की एक विज्ञान पत्रिका में छपा है. कौस्तुभ सुपेकर के नेतृत्व में हुए इस शोध में 24 बच्चों के दिमाग को स्कैन किया गया. इन बच्चों की उम्र 8 से 9 साल के बीच है. इन बच्चों को आठ हफ्तों तक गणित का अभ्यास कराया गया. इस दौरान मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानी एमआरआई के जरिए उनके दिमाग में हो रही गतिविधियों पर नजर रखी गयी.

अभ्यास के दौरान पाया गया कि बच्चों की सवाल हल करने की क्षमता बढ़ रही है, कुछ बच्चों में यह अन्य बच्चों की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ी. वैज्ञानिकों ने पाया कि दिमाग का वह हिस्सा जो यादाश्त के लिए जिम्मेदार होता है, उसी हिस्से पर अभ्यास के दौरान भी असर पड़ रहा है. इसे हिपोकैम्पस कहा जाता है.

शोध में यह भी पाया गया कि अधिक बौद्धिक स्तर यानी आईक्यू का गणित से कोई लेना देना नहीं है और ना ही पाठ को पढ़ने की क्षमता से. यानी एक बच्चा गणित में बुरा और भाषा में अच्छा हो सकता है. यही वजह है कि कई बार बच्चे किसी एक विषय में अव्वल और दूसरे में बेहद कमजोर होते हैं. गणित बच्चे का ध्यान अपनी ओर खींच सकेगा या नहीं यह उसके मन से ज्यादा दिमाग की बनावट पर निर्भर करेगा.

आईबी/एएम (डीपीए)

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