1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मनोरंजन

सब कुछ पब्लिसिटी के लिए करता हूं: राम गोपाल वर्मा

मशहूर फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा का कहना है कि वह जो भी करते हैं, सब प्रचार पाने का तरीका होता है. फिलहाल विरोध और धमकियों के बावजूद वह अपनी नई फिल्म रक्त चरित्र का प्रीमियर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में कर रहे हैं.

default

पब्लिसिटी के प्यासे रामू

रक्त चरित्र आंध्र प्रदेश के एक राजनीतिज्ञ परिताला रवि की कहानी पर बनाई गई जिनकी 2005 में हत्या कर दी गई. रवि के पुश्तैनी शहर अनंतपुर में रामू की इस फिल्म का तीखा विरोध हो रहा है. लेकिन वह कहते हैं कि अनंतपुर में फिल्म का प्रीमियर रखना उन लोगों को शांत करने का अच्छा तरीका है जो कह रहे हैं कि फिल्म में माटी के इस लाल की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है.

जब राम गोपाल वर्मा से पूछा गया कि क्या यह प्रचार पाने का उनका नया तरीका है, तो उन्होंने बिना लागलपेट कहा, "बिल्कुल. यह प्रचार पाने का तरीका है. मैं जो कुछ करता हूं, वह सब पब्लिसिटी स्टंट है. मैं फिल्म बनाने के कारोबार से जुड़ा हूं. और फिल्मों को प्रचार की जरूरत होती है."

21 अक्टूबर तो जब रामू अपनी नई फिल्म के सितारों विवेक ओबेरॉय, सूर्या और पद्मप्रिया के साथ प्रीमियर के लिए अनंतपुर पहुंचेंगे तो पूरे शहर में सुरक्षा बेहद कड़ी रहेगी. राम गोपाल वर्मा कहते हैं, "जिन लोगों को इस फिल्म से दिक्कत है, उन्हें यह फिल्म देखनी चाहिए ताकि उन्हें पता चले कि अफवाहें गलत हैं. यह उनकी अपनी कहानी है. फिल्म उन्हीं के बारे में है. इसलिए फिल्म के प्रीमियर को अनंतपुर में रखा गया है."

आंध्र प्रदेश में इस फिल्म की शूटिंग के दौरान काफी विरोध प्रदर्शन हुए. अब प्रीमियर के समय भी ऐसी आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है. इसीलिए फिल्म के निर्माताओं ने राम गोपाल वर्मा, विवेक और उनकी टीम के लिए तीन स्तरों वाली सुरक्षा का इंतजाम किया है.

फिल्म के पोस्टर पर महाभारत से लिए गए इस वाक्य पर सेंसर बोर्ड को भी आपत्ति है कि "बदले की भावना ही सबसे सच्ची भावना होती है." फिल्म के निर्देशक का कहना है, "हां, मुंबई और हैदराबाद में सेंसर को इस वाक्य पर आपत्ति थी. इस बारे में जारी बहस पर काम चल रहा है. देखते हैं क्या होता है."

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब कुछ हट कर फिल्म बनाने के लिए मशहूर रामू का वास्ता इस तरह के विवाद से पड़ा है. 2009 में अपनी फिल्म अज्ञात के प्रचार के लिए उन्होंने मुंबई के सबसे व्यस्त राजमार्गों पर फिल्म के पोस्टर के साथ शवों की डमी भी लटका दी थी जिसे लेकर खासा बवाल हुआ. रण फिल्म में उन पर राष्ट्रगान से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे. लेकिन राम गोपाल वर्मा का कहना है कि विवाद वह नहीं, बल्कि मीडिया खड़े करता है. वह कहते हैं, "मैं लोगों को ध्यान खींचने के लिए कुछ करता हूं तो मीडिया उस पर खबरें चला देता है और फिर उनसे विवाद पैदा होता है."

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः उज्ज्वल भट्टाचार्य

DW.COM

WWW-Links