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दुनिया

सबसे ज्यादा पैसे घर भेजते हैं भारतीय

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देशों के प्रवासियों ने 2010 में अपने अपने देशों को कुल 325 अरब डॉलर भेजे. दुनिया में पैसा सबसे ज्यादा भारत, मेक्सिको, फिलिपींस, चीन और फ्रांस भेजा गया.

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वॉशिंगटन में वर्ल्ड बैंक का दफ्तर

रिपोर्ट में लिखा है कि हाल की आर्थिक मंदी के दौर में विकासशील देशों के बाहर से पैसों की आपूर्ति ने अर्थव्यवस्था को सुधारने में योगदान दिया. 2010 के अंत तक भेजी जाने वाली रकम 325 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी. 2009 में यह आंकड़ा 300 अरब डॉलर के करीब था. पूरे विश्व में इस साल भेजे जाने वाले धन की रकम कुल 440 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है.

आर्थिक मंदी में प्रवासियों ने की मदद

2009 में सबसे ज्यादा पैसे अमेरिका, सउदी अरब, स्विट्जरलैंड, रूस और जर्मनी से भेजे गए जबकि 2010 में पैसा वसूल

Bildgalerie EU-Osterweiterung II: Zypern

करने वाले देशों में भारत, चीन, मेक्सिको, फिलिपींस और फ्रांस सबसे आगे थे. छोटे देशों के मामले में भेजी गई रकम उनके सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी का ज्यादा बड़ा हिस्सा थी. कुछ देशों में विदेशों से भेजी गई रकम जीडीपी का 25 प्रतिशत हिस्सा थी. भारत को सबसे ज्यादा 55 अरब डॉलर मिले जबकि चीन को मिले 51 अरब डॉलर. मेक्सिको के प्रवासियों ने देश में 22.6 अरब डॉलर भेजे जबकि फिलिपींस में लोगों को मिले 21.3 अरब डॉलर. फ्रांस के लोगों ने 15.9 अरब डॉलर अपने देश भेजे.

विश्व बैंक का कहना है कि विकासशील देशों को मिलने वाली रकम दो साल बढ़कर 370 डॉलर पार कर सकती है. विकास संभावनाओं को जांचने वाले हांस टिमर का कहना है, "रुपयों का ट्रांसफर आर्थिक मदद का एक अहम हिस्सा है जो सीधी तरह से प्रवासियों के परिवारों की आमदनी बढ़ाता है. इससे स्वास्थ्य, शिक्षा और छोटे उद्योगों में बढ़ोतरी होती है. अगर प्रवासन और रुपयों के ट्रांसफर को नीति-निर्देशक ध्यान से देखें, तो वे इस बड़ी रकम का सही तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं. यह रकम विकास मदद से तीन गुना ज्यादा है." विश्व बैंक के दिलीप रथ कहते हैं कि 2008-2009 में गरीब देशों के लिए विदेशी बैंक ट्रांसफर बहुत मददगार साबित हुए क्योंकि आर्थिक मंदी की वजह से आमदनी वैसे ही कम हो गई थी.

विकासशील देशों में अधिक प्रवासन

हालांकि विकसित देश पैसे भेजने के मुख्य स्रोत हैं, लेकिन विकासशील देशों में आपस में बहुत प्रवासन होता है. विकासशील देशों से ओईसीडी (आर्थिक सहयोग और विकास संगठन) वाले देशों में इसके मुकाबले कम प्रवासन होता है. लेकिन विकसित देशों ने भी प्रवासन के कानून सख्त कर दिए हैं. रथ कहते हैं कि बेरोजगारी बढ़ने की वजह से विकसित देश सीधे प्रवासियों को कानूनों का निशाना बना सकते हैं और इसका सीधा असर रुपयों के ट्रांसफर पर होगा. मंदी के अलावा वैश्विक स्तर पर रुपयों को भेजने के नियम और ढांचे में बदलाव आ रहे हैं. साथ ही वित्तीय अपराधों की वजह से मोबाइल ट्रांसफरों में भी दिक्कतें आ गई हैं.

टॉप पर अमेरिका

विश्व बैंक के फैक्टबुक 2011के मुताबिक अमेरिका प्रवासियों का पसंदीदा देश है. इसके बाद रूस, जर्मनी, सउदी अरब और कनाडा दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर हैं. जनसंख्या को देखा जाए तो कतर में 87 प्रतिशत प्रवासी हैं, मोनैको में 72 और अरब अमीरात में 70 प्रतिशत प्रवासन है. विश्व में सबसे ज्यादा प्रवासी मेक्सिको से अमेरिका जाते हैं. दूसरे स्थान पर रूस से यूक्रेन जा रहे लोग, तीसरे पर यूक्रेन से रूस जा रहे प्रवासी और चौथे स्थान पर बांग्लादेश से भारत जा रहे प्रवासी हैं.

रिपोर्टः मानसी गोपालकृष्णन

संपादनः वी कुमार

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