सबसे कठिन रेस में 10 लाख का इनाम | खेल | DW | 03.08.2014
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खेल

सबसे कठिन रेस में 10 लाख का इनाम

रेगिस्तान में पांच दिन के भीतर 1000 किलोमीटर की रेस. माउंटेन बाइकर्स को 10 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि लुभा रही है लेकिन साइन करने से पहले उन्हें कहा जा रहा है, "यह आपकी जिंदगी को बदल सकता है या खत्म कर सकता है."

10 लाख डॉलर का इनाम पाने की उम्मीद रखने वाले भादीदारों को चेतावनी दी जा रही है. द मुंगा में 3 दिसंबर को शुरू होने वाली रेस में हिस्सा लेने के लिए दो लोगों की टीम को 10,000 डॉलर की फीस देनी होगी. दक्षिण अफ्रीका के कारू रेगिस्तान में गर्मियों के उफान पर होने वाली रेस में 1000 किलोमीटर तक साइकिल सवारों को बिना किसी सहायता के रेस में भाग लेना होगा. लेकिन फिनिश लाइन पार कर दत्रिणी केप के वाइन वाली पहाड़ियों में स्टेलेनबॉश पहुंचने वाले जोड़े को साढ़े सात लाख डॉलर की इनामी राशि मिलेगी.

बिना रुके और ठीक से खाए या सोये बिना की जाने वाली माउंटेन बाइकिंग की चुनौती के कारण द मुंगा प्रतियोगिता को दुनिया की सबसे कठिन रेसों में गिनी जाती है. लेकिन सबसे अहम इमामी राशि है. कठिन प्रतिस्पर्धाओं के विशेषज्ञ एथलीट और इस आयोजन के दिमाग एलेक्स हैरिस कहते हैं, "मैंने खुद में और इन लोगों में पाया है कि एक्सट्रीम रेसों में गहरा श्रम करते हैं और वे ऐसा इससे मिलने वाली खुशी के लिए करते हैं."

हैरिस का कहना है कि इनाम की राशि और रेस के फॉर्मेट की वजह से लोग पहले से ज्यादा कोशिश करेंगे. इसीलिए यह दुनिया की सबसे कठिन रेस है. हैरिस खुद मल्टीपल नेशनल ट्रैक साइक्लिंग चैंपियन रहे हैं और बिना किसी सहायता के दक्षिणी ध्रुव तक जा चुके हैं और माउंट एवरेस्ट पर चढ़ चुके हैं. हैरिस का कहना है कि रेस में भाग लेने वाले 20 फीसदी प्रत्याशी अनुभवी और प्रोफेशनल साइक्लिस्ट होंगे जिनके जीतने की उम्मीद होगी. बाकी 80 फीसदी पेशेवर साइक्लिस्ट होंगे जो रोमांच के लिए और पांच दिन में रेस पूरा कर सकने के लिए उसमें हिस्सा लेंगे.

रेस जीतने के लिए प्रत्याशियों को रणनीति और मनोविज्ञान का सहारा लेना होगा ताकि वे अपनी टीम के साथी की दिमागी और शारीरिक हालत पर ध्यान रखते हुए सोने और खाने के लिए समय निकाल सकें. हैरिस के अनुसार रेस के अंत में खिलाड़ियों को मनोवैज्ञानिक दबाव और शारीरिक थकान का सामना करना होगा. वे कहते हैं, "नींद के दानव आने लगते हैं, वे आपकी पलकों को खींचने लगते हैं और आप सब कुछ छोड़कर सिर्फ सोना चाहते हैं." लेकिन यदि साइक्लिस्ट यह बाधा पार कर ले तो वह कठिनाइयों को सहने का दावा कर सकता है.

एमजे/ओएसजे (रॉयटर्स)

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