सबको खुश नहीं कर सकतीं विद्या | मनोरंजन | DW | 21.06.2013
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मनोरंजन

सबको खुश नहीं कर सकतीं विद्या

विद्या बालन पहली बार घनचक्कर में एक कॉमेडी रोल कर रही हैं. फिल्म प्रमोशन के लिए कोलकाता आई विद्या ने डॉयचे वेले से बातचीत में बताया कि अब नई फिल्म को लेकर पहले जैसा दबाव नहीं रहता.

आप पहली बार कॉमेडी रोल निभा रही हैं. ऐसी भूमिका हाथ में लेने का फैसला कैसे किया?

अब तक बोल्ड और यथार्थवादी फिल्में करने की वजह से मैं शुरू में इस भूमिका से हिचक रही थी. बाद में मुझे लगा कि यह अपने अंदर के कलाकार को निखारने और परखने का एक बेहतरीन मौका है. इसके अलावा मुझे इसकी पटकथा बेहद पसंद आई. इसलिए मैंने यह भूमिका हाथ में लेने का फैसला किया.

घनचक्कर में आपका किरदार कैसा है?

इसमें मेरा किरदार एक आम मध्यवर्ग की महिला का है. मैंने इसमें एक ऐसी पंजाबी पत्नी की भूमिका निभाई है जिसकी पूरी दुनिया उसके घर, पति और खाना पकाने तक ही सीमित है. वह ज्यादा फैशनेबल नहीं है. लेकिन उसका किरदार आत्मविश्वास से भरा है. कुल मिला कर इसमें मेरा किरदार अच्छा है.

इस फिल्म में इमरान हाशमी के साथ आपके चुंबन के दृश्य की भी काफी चर्चा है?

हां, इसमें एक ऐसा दृश्य है. लेकिन यह कहानी की मांग है. यह फिल्म एक ऐसे जोड़े के बारे में है जिनकी शादी को पांच साल हो गए हैं.

फिल्मों में कैसे आईं?

अभिनय करना मेरा सपना था. मैं अलग-अलग किरदारों को जीना और उनसे सीखना चाहती थी. इसलिए मैंने अभिनय को चुना. यही वजह है कि मैं हर फिल्म में अलग-अलग किरदार निभाने की कोशिश करती हूं.

कान फिल्मोत्सव का अनुभव कैसा रहा?

यह एक शानदार अनुभव रहा. ज्यूरी के सदस्य के तौर पर इसमें शामिल होने का मतलब यह था कि हर जगह मुझसे शाही व्यवहार किया गया. यह अलग बात है कि अपने देश में कुछ लोगों को मेरी पोशाक पसंद नहीं आई. (कान की जूरी में विद्या)

अब तक के सफर में कोई अफसोस?

हां, ऋतुपर्णो घोष की अकाल मौत से मुझे सदमा लगा. मैं उनके साथ काम करना चाहती थी. वह भी लगातार इस पर जोर दे रहे थे. उनसे कई फिल्मों पर मेरी चर्चा भी हुई थी. लेकिन संयोग नहीं बना.

क्या अब भी किसी नई फिल्म को लेकर दबाव महसूस होता है?

अब ऐसा नहीं होता. छह साल पहले तक दबाव बन जाता था. लेकिन मैंने फैसला किया कि अब दबाव में नहीं आऊंगी. आप एक साथ पूरी दुनिया को खुश नहीं रख सकते.

कहानी का सीक्वल करना चाहती हैं?

जरूर. लेकिन सुजय घोष फिलहाल काफी व्यस्त हैं. उनको पटकथा लिखने में समय लगेगा. लेकिन मैं उस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं.

क्या आपका भी छोटे परदे की ओर लौटने का कोई इरादा है ?

फिलहाल तो नहीं. छोटे परदे के मुकाबले बड़े परदे पर काम करना ज्यादा आसान है. हो सकता है आगे चल कर इस बारे में सोचूं.

घनचक्कर के बाद ?

फिलहाल शादी के साइड इफेक्ट्स की शूटिंग चल रही है. यह प्यार के साइड इफेक्ट्स का सीक्वल है.

इंटरव्यू: प्रभाकर, कोलकाता

संपादन: निखिल रंजन

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