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ताना बाना

सफेदपोशों को मिले कड़ी सजाः मूर्ति

भारत के सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री आइकॉन नारायण मूर्ति ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया है कि समाज के कुलीन वर्ग का एक हिस्सा संगीन अपराध करने के बावजूद सजा से बचा हुआ है.

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जानी मानी आईटी कंपनी इन्फोसिस के प्रमुख नारायण मूर्ति से जब पूछा गया कि इन दिनों देश में कुलीन कहे जाने वाले वर्ग में अपराध क्यों बढ़ रहे हैं तो उन्होंने कहा कि जानकारी और तथ्यों पर आधारित जांच प्रक्रिया तेजी से होनी चाहिए और मीडिया को इन मामलों को तूल नहीं देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि यदि जिम्मेदार व्यक्ति दोषी है तो उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए. अगर कड़ी सजा का प्रावधान होगा और प्रक्रिया तेज होगी तो सबकुछ ठीक हो जाएगा. उन्होंने कहा कि आज हम देख रहे हैं कि संभ्रात वर्ग के लोगों को अपराधी होने के बावजूद सजा नहीं मिल पा रही है. यह समाज के लिए अच्छा नहीं है.

हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के 10 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित "उद्यमशीलता और समाजिक बदलाव" विषय पर आधारित सम्मेलन में नारायण मूर्ति ने यह बात कही. हालांकि मूर्ति ने विशेष तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जबकि देश में भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर हो रहे हैं.

उन्होंने बिजनेस में नैतिक मूल्यों को लागू करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि घोटाले हों या न हों लेकिन आपको बिजनेस में नैतिक मूल्यों को प्रमुखता से जगह देनी होगी. बिजनेस करने का यही तरीका है और इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

उन्होंने कहा कि बिजनेस में नैतिकता का बहुत महत्व है. यह बिजनेस के लिए वैसा ही है, जैसे कि सड़क पर गाड़ी चलाते समय यातायात के नियमों का पालन करना जरूरी है. यह हमारे साथ साथ दूसरों के लिए भी अच्छा होगा.

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हमें चीजों में और पारदर्शिता लानी होगी. साथ ही न्यायपूर्ण वातावरण बनाना होगा और नियमों को बेहतर तरीके से लागू करना होगा, जिससे भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे.

देश का सकल घरेलू उत्पाद 8.5 प्रतिशत है और कुछ लोग इससे खुश हैं, लेकिन देश के कई भाग ऐसे हैं जहां अब भी लोग बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. मूर्ति ने कहा कि 36 करोड़ लोग आज भी गरीबी रेखा के नीचे हैं, जबकि 65 करोड़ खेती पर निर्भर हैं और सकल घरेलू उत्पाद में केवल 20 से 21 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं. इनकी सालाना आय मात्र 15 से 16 हजार रुपये है.

मूर्ति ने कहा कि सामाजिक बदलाव के लिए हर बच्चे के लिए बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं जुटानी होंगी. यह पूछे जाने पर कि बजट से उन्हें क्या उम्मीद है, मूर्ति ने कहा कि अच्छा होगा कि सरकार अपने वार्षिक बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आधारभूत सुविधाओं को ध्यान में रखे.

रिपोर्टः एजेंसियां/एसके

संपादनः ए जमाल

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