सफल महिलाओं से घबराते चीनी पुरुष | मनोरंजन | DW | 30.09.2013
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मनोरंजन

सफल महिलाओं से घबराते चीनी पुरुष

चीन की युवा महिलाएं बड़े असमंजस का सामना कर रही हैं. उनके सामने दो विकल्प हैं, करियर या दूसरा. करिय बनाने में अगर उम्र 30 हो गई तो उन्हें बचे खुचे सामान की तरह देखा जाता है. ऐसी महिलाओं की शादी नहीं हो पा रही है.

26 से 29 साल की उम्र में सफल करियर बनाने वाली चीनी महिलाएं कई तरह के दवाब झेल रही हैं. परिवार, मित्र और सरकार उम्मीद कर रही है कि वे योग्य जीवनसाथी ढूंढे और घर बसाएं. ये जितना जल्द हो उतना बेहतर क्योंकि 30 पार करते ही उन्हें 'लेफ्टओवर वुमेन' (बची खुची महिलाएं) कहा जाने लगा है. बहुत आशंका है कि ऐसी महिलाओं की शादी कभी नहीं हो पाए.

28 साल के कार्टूनिस्ट लिओ ली कहते हैं, "कई लोगों को लगता है कि अकेली महिला के 'लेफ्ट ओवर' बनने के कई चरण हैं. पहली रैंक है 26 से 27 साल, इस उम्र की महिलाओं को 'लेफ्टओवर फाइटर्स' कहा जाता है. 32 से 35 साल की महिलाओं को 'पिज्जा हट वुमेन' कहा जाता है. इन्हें बेसब्री से पति की खोज करने वाली महिलाएं माना जाता है." लेफ्टओवर मामले पर कार्टून बनाने वाली टीम के सदस्य लिओ कहते हैं कि इसके बाद 35 के पार वाली महिलाएं आती हैं जिन्हें 'हाई लेवल लेफ्टओवर वुमेन' करार दिया जाता है.

चीनी महिला के लिए उम्र 30 साल होने का मतलब है कि उसे जीवनसाथी बहुत मुश्किल से ही मिल सकता है. 'एक बच्चा' नीति की वजह से चीन का समाज लड़कों को अहमियत देता है. वामपंथी शासन होने के बावजूद चीनी समाज पुरुष प्रधान है. मशहूर टीवी मैच मेकर नी लिन के मुताबिक चीनी समाज का ढांचा ऐसा है जिसमें पुरुष हमेशा पत्नी से आय, शिक्षा, संपत्ति के मामले में आगे रहेगा. नी कहती हैं, पुरुष रिश्ते में हर आयाम से ऊपर रखे जाते हैं.

पितृप्रधान समाज का असर

हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सटी की शोधकर्ता सैंडी टो कहती हैं, "पुरुषों का व्यवहार और उनकी सोच अब भी पितृप्रधानता से भरी है." चीन की अकेली महिलाओं के साथ गहराई से इंटरव्यू करने के उन्हें लगता है कि चीनी पुरुष अपने जैसी सफलता वाली महिला के साथ रहने में घबराते हैं.

टीवी मेजबान नी कहती हैं, "इसकी वजह से ऐसा हो गया है कि ए श्रेणी का पुरुष बी श्रेणी की महिला से शादी करता है, बी श्रेणी का पुरुष सी श्रेणी की महिला से और सी ग्रेड का पुरुष डी ग्रेड की महिला से शादी करता है. केवल ए ग्रेड महिला और डी ग्रेड पुरुष साथी नहीं खोज पाते हैं."

तेज आर्थिक विकास ने समाजिक सोच भी बदली है. करियर के लिहाज से ए ग्रेड में आने वाली इंटीरियर डिजायनर डा लु पांच साल पहले बीजिंग आई. उन्होंने पुरुष साथी खोजने के लिए जमीन आसमान एक दिया लेकिन सफलता नहीं मिली. डा कहती हैं, "शादी ऐसी चीज नहीं थी जो मैं वाकई चाहती थी. मैं अपने लिए कुछ करना चाहती थी."

दवाब में महिलाएं

डा अब 42 साल की हो चुकी हैं. उनके रिश्तेदार और आस पास के लोग उन्हें लेकर चिंता में रहते हैं. डा कहती हैं, "दबाव सिर्फ परिवार के सदस्यों की तरफ से ही नहीं आता, बल्कि ये हर तरफ से आता है." सैंडी के साथ इंटरव्यू में डा ने कहा कि अकेली महिलाएं भी शादी के सपने देखती हैं लेकिन उनकी सफलताओं की वजह से पुरुष उन्हें नकार देते हैं. कई सफल चीनी महिलाओं पर करियर क्रेजी का आरोप लगाया जाता है. डा के मुातबिक "सरकार भी शादी न करने का आरोप इन्हीं महिलाओं पर लगाती हैं. उन्हें लगता है कि महिलाएं खुद को इस हालत में धकेल रही हैं, करियर पर ज्यादा ध्यान देने की वजह से वो पुरुष चुनने में भी बहुत ही नखरेदार हो जाती हैं."

सैंडी के मुताबिक चीन की महिलाएं भावी जीवनसाथी तलाशने के लिए पश्चिमी देशों के पुरुषों की तरफ देख रही हैं. उन्हें लगता है कि पश्चिमी देशों के पुरुष ज्यादा खुले दिमाग के होते हैं. उनके भीतर चीनी पुरुषों की तुलना में पितृसत्तामक व्यवहार कम होता है.

डा लु ने अब इस बारे में सोचना ही बंद कर दिया है. वह कहती हैं, "मेरे दोस्त मेरी मदद करेंगे वैसे ही जैसे जरूरत पड़ने पर मैं उनकी मदद करुंगी." रिसर्चरों के मुताबिक चीन में महिलाओं को लेफ्टओवर समझने की सोच खत्म होने में अभी लंबा वक्त लगेगा, लेकिन एक दिन ये बदलेगी जरूर. ज्यादा से ज्यादा महिलाओं के अच्छी शिक्षा पाने के बाद चीनी पुरुष उन्हें निचले दर्जे का नहीं समझ पाएंगे.

रिपोर्ट: सारा स्टेफान /ओ सिंह

संपादन: एन रंजन

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